• कृषि : मूंगफली की खेती कैसे करें? बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी | उन्नत किस्में, खाद, उत्पादन

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    कृषि
    कृषि   - नीमच[12-02-2026]
  • मालवांचल मित्र, कृषि डेस्क: बुवाई से लेकर कटाई तक पूरी जानकारी | कृषि समाचार विशेष

    मूंगफली (Groundnut) भारत की प्रमुख तिलहनी फसलों में से एक है। कम लागत, कम सिंचाई और बेहतर बाजार भाव के कारण यह किसानों के लिए लाभकारी फसल मानी जाती है। सही तकनीक अपनाकर प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। आइए जानते हैं बीज से लेकर कटाई तक पूरी जानकारी।

    जलवायु और मिट्टी

    • जलवायु: गर्म एवं आर्द्र जलवायु उपयुक्त

    • तापमान: 25–35°C

    • वर्षा: 50–100 सेमी

    • मिट्टी: बलुई दोमट या हल्की दोमट सर्वोत्तम

    • pH मान: 6.0–7.5

    खेत में पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए, अन्यथा फली सड़न की समस्या बढ़ सकती है।

    बुवाई का सही समय

    मौसम

    बुवाई का समय

    खरीफ

    जून अंत – जुलाई मध्य

    रबी (कुछ क्षेत्रों में)

    अक्टूबर

    जायद

    फरवरी – मार्च

    खरीफ की फसल सर्वाधिक बोई जाती है और बेहतर उत्पादन देती है।

    उन्नत किस्में

    • JL-24

    • GG-20

    • TG-37A

    • राजस्थान मूंगफली-1

    • HNG-10

    किस्म का चयन अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार करें।

    खेत की तैयारी

    • 2–3 बार गहरी जुताई करें।

    • अंतिम जुताई में पाटा चलाकर खेत समतल करें।

    • 8–10 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी हुई गोबर खाद मिलाएं।

    बीज की मात्रा और बुवाई विधि

    • बीज दर: 80–100 किग्रा प्रति हेक्टेयर

    • बुवाई गहराई: 4–5 सेमी

    • कतार दूरी: 30–45 सेमी

    • पौधे की दूरी: 10–15 सेमी

    बीज उपचार

    • थायरम/कार्बेन्डाजिम 2–3 ग्राम प्रति किलो बीज

    • राइजोबियम कल्चर से उपचार करने पर उत्पादन बढ़ता है

    खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

    • नाइट्रोजन: 20 किग्रा/हेक्टेयर

    • फॉस्फोरस: 40–60 किग्रा/हेक्टेयर

    • पोटाश: 40 किग्रा/हेक्टेयर

     फूल आने के समय 200 किग्रा/हेक्टेयर जिप्सम डालने से दाने का विकास बेहतर होता है।

    सिंचाई प्रबंधन

    • खरीफ में सामान्य वर्षा पर्याप्त होती है।

    • फूल एवं फली बनने के समय नमी जरूरी।

    • अधिक सिंचाई से बचें।

    खरपतवार नियंत्रण

    • बुवाई के 20–25 दिन बाद निराई-गुड़ाई।

    • आवश्यकता अनुसार पेंडीमेथालिन जैसे शाकनाशी का प्रयोग।

    रोग एवं कीट नियंत्रण

    मुख्य रोग: टिक्का रोग, जड़ सड़न
    नियंत्रण: मैनकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव

    मुख्य कीट: माहू, सफेद लट
    नियंत्रण: नीम तेल या अनुशंसित कीटनाशक

    कटाई और उत्पादन

    • फसल अवधि: 90–120 दिन

    • पत्तियां पीली पड़ने पर खुदाई करें

    • 3–4 दिन धूप में सुखाएं

     औसत उत्पादन: 15–25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (उन्नत तकनीक से अधिक संभव)

    लाभ और सुझाव

    • कम लागत में अच्छी आय

    • तेल मिलों में स्थिर मांग

    • फसल चक्र में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक

    निष्कर्ष:
    यदि किसान समय पर बुवाई, उन्नत बीज, संतुलित खाद और रोग-कीट प्रबंधन अपनाएं, तो मूंगफली की खेती अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।



  • कृषि : मूंगफली की खेती कैसे करें? बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी | उन्नत किस्में, खाद, उत्पादन

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    कृषि
    कृषि   - नीमच[12-02-2026]

    मालवांचल मित्र, कृषि डेस्क: बुवाई से लेकर कटाई तक पूरी जानकारी | कृषि समाचार विशेष

    मूंगफली (Groundnut) भारत की प्रमुख तिलहनी फसलों में से एक है। कम लागत, कम सिंचाई और बेहतर बाजार भाव के कारण यह किसानों के लिए लाभकारी फसल मानी जाती है। सही तकनीक अपनाकर प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। आइए जानते हैं बीज से लेकर कटाई तक पूरी जानकारी।

    जलवायु और मिट्टी

    • जलवायु: गर्म एवं आर्द्र जलवायु उपयुक्त

    • तापमान: 25–35°C

    • वर्षा: 50–100 सेमी

    • मिट्टी: बलुई दोमट या हल्की दोमट सर्वोत्तम

    • pH मान: 6.0–7.5

    खेत में पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए, अन्यथा फली सड़न की समस्या बढ़ सकती है।

    बुवाई का सही समय

    मौसम

    बुवाई का समय

    खरीफ

    जून अंत – जुलाई मध्य

    रबी (कुछ क्षेत्रों में)

    अक्टूबर

    जायद

    फरवरी – मार्च

    खरीफ की फसल सर्वाधिक बोई जाती है और बेहतर उत्पादन देती है।

    उन्नत किस्में

    • JL-24

    • GG-20

    • TG-37A

    • राजस्थान मूंगफली-1

    • HNG-10

    किस्म का चयन अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार करें।

    खेत की तैयारी

    • 2–3 बार गहरी जुताई करें।

    • अंतिम जुताई में पाटा चलाकर खेत समतल करें।

    • 8–10 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी हुई गोबर खाद मिलाएं।

    बीज की मात्रा और बुवाई विधि

    • बीज दर: 80–100 किग्रा प्रति हेक्टेयर

    • बुवाई गहराई: 4–5 सेमी

    • कतार दूरी: 30–45 सेमी

    • पौधे की दूरी: 10–15 सेमी

    बीज उपचार

    • थायरम/कार्बेन्डाजिम 2–3 ग्राम प्रति किलो बीज

    • राइजोबियम कल्चर से उपचार करने पर उत्पादन बढ़ता है

    खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

    • नाइट्रोजन: 20 किग्रा/हेक्टेयर

    • फॉस्फोरस: 40–60 किग्रा/हेक्टेयर

    • पोटाश: 40 किग्रा/हेक्टेयर

     फूल आने के समय 200 किग्रा/हेक्टेयर जिप्सम डालने से दाने का विकास बेहतर होता है।

    सिंचाई प्रबंधन

    • खरीफ में सामान्य वर्षा पर्याप्त होती है।

    • फूल एवं फली बनने के समय नमी जरूरी।

    • अधिक सिंचाई से बचें।

    खरपतवार नियंत्रण

    • बुवाई के 20–25 दिन बाद निराई-गुड़ाई।

    • आवश्यकता अनुसार पेंडीमेथालिन जैसे शाकनाशी का प्रयोग।

    रोग एवं कीट नियंत्रण

    मुख्य रोग: टिक्का रोग, जड़ सड़न
    नियंत्रण: मैनकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव

    मुख्य कीट: माहू, सफेद लट
    नियंत्रण: नीम तेल या अनुशंसित कीटनाशक

    कटाई और उत्पादन

    • फसल अवधि: 90–120 दिन

    • पत्तियां पीली पड़ने पर खुदाई करें

    • 3–4 दिन धूप में सुखाएं

     औसत उत्पादन: 15–25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (उन्नत तकनीक से अधिक संभव)

    लाभ और सुझाव

    • कम लागत में अच्छी आय

    • तेल मिलों में स्थिर मांग

    • फसल चक्र में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक

    निष्कर्ष:
    यदि किसान समय पर बुवाई, उन्नत बीज, संतुलित खाद और रोग-कीट प्रबंधन अपनाएं, तो मूंगफली की खेती अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।