मालवांचल मित्र, संपादकीय: मध्यप्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य में जहां किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सरकार की प्राथमिकता मानी जाती है, वहीं नीमच जिला आज भी इस बुनियादी सुविधा से वंचित है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है बल्कि कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
राज्य में किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश बीज विकास निगम की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से विभिन्न जिलों में बीज वितरण केंद्र और कार्यालय संचालित होते हैं। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि जिले के गठन के वर्षों बाद भी नीमच में न तो निगम की जिला इकाई कार्यालय स्थापित हो सकी है और न ही कोई अधिकृत बीज वितरण केंद्र शुरू किया गया है।
इस कमी का सीधा असर जिले के किसानों पर पड़ रहा है। उन्नत कृषि की ओर बढ़ रहे युवा किसान और परंपरागत कृषक दोनों ही निजी विक्रेताओं पर निर्भर हैं, जहां बीजों की कीमत और गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि प्रभावशाली लोगों के निजी व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देने के कारण सरकारी व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर रखा गया है।
स्थिति की गंभीरता इस बात से भी स्पष्ट होती है कि भारतीय किसान संघ जैसे संगठनों द्वारा इस मुद्दे को लेकर दो बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। किसानों का कहना है कि ज्ञापन देने के बाद भी केवल आश्वासन मिला, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है।
नीमच जिला देश के उन चुनिंदा क्षेत्रों में शामिल है जहां मंडी व्यवस्था और औषधीय फसलों का उत्पादन विशेष पहचान रखता है। ऐसे महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र में बीज विकास निगम की अनुपस्थिति न केवल किसानों के साथ अन्याय है, बल्कि यह कृषि विकास की दिशा में भी एक बड़ा अवरोध है।
यह सवाल अब सीधे तौर पर सत्ता और प्रशासन दोनों के सामने खड़ा है—क्या नीमच के किसानों को उनके हक की बुनियादी सुविधा मिलेगी, या फिर वे निजी हितों के बीच इसी तरह संघर्ष करते रहेंगे?
सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द नीमच में बीज विकास निगम की जिला इकाई और बीज वितरण केंद्र की स्थापना सुनिश्चित करे। पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ यदि यह कदम उठाया जाता है, तो न केवल किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में भरोसा भी मजबूत होगा।