उज्जैन में अर्थशास्त्र के बड़े चिंतक डॉ. आर.पी. गुप्ता का निधन
मध्यप्रदेश के जाने-माने अर्थशास्त्री, समाजसेवी और चिंतक डॉ. रामप्रताप गुप्ता (डॉ. आर.पी. गुप्ता) का आज 2 मई 2026 को सुबह लगभग 8 बजे उज्जैन में निधन हो गया। वे 93 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उम्र संबंधी समस्याओं के चलते उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन से न सिर्फ रामपुरा और नीमच क्षेत्र, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और देश ने एक ऐसे विचारक को खो दिया है, जिसने विकास और समाज के बीच संतुलन की आवाज हमेशा बुलंद की।
विस्थापन से शुरू हुई जिंदगी, संघर्ष से बना व्यक्तित्व
सन् 1933 में चित्तौड़ जिले के मातासरा गांव में जन्मे डॉ. गुप्ता का बचपन ही संघर्षों से भरा रहा। चंबल नदी पर बने राणाप्रताप सागर बांध के कारण उनका गांव डूब गया और परिवार को विस्थापित होना पड़ा।
इन्हीं परिस्थितियों के बीच उन्होंने शिक्षा को हथियार बनाया और अपने परिवार में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बने। कोटा से पढ़ाई पूरी कर उन्होंने सारंगपुर में शिक्षक के रूप में करियर शुरू किया और बाद में कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक बने।
शिक्षा और शोध में उत्कृष्ट योगदान
डॉ. गुप्ता ने पुणे के गोखले इंस्टिट्यूट से अर्थशास्त्र में पीएचडी की और अपने शोध के माध्यम से कई महत्वपूर्ण लेख और पुस्तकें लिखीं।
वे विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से जुड़े विभिन्न कॉलेजों में वर्षों तक अर्थशास्त्र पढ़ाते रहे और हजारों छात्रों को दिशा दी।
बड़े बांधों और विस्थापन पर उठाई सबसे मजबूत आवाज
डॉ. आर.पी. गुप्ता की पहचान सिर्फ एक शिक्षक के रूप में नहीं, बल्कि एक सजग सामाजिक चिंतक के रूप में भी थी।
उनकी सबसे बड़ी चिंता थी—