• होम
  • वीडियो
  • सर्च
  • Contact
× Avatar
Forgot password?
  • देशदेश
  • विदेशविदेश
  • राज्यराज्य
  • शहरशहर
  • मंडी भावमंडी भाव
  • व्यापारव्यापार
  • धर्मधर्म
  • खेलखेल
  • सुप्रभातसुप्रभात
  • चुनावचुनाव
  • मनोरंजनमनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी समाचारटेक्नोलॉजी समाचार
  • संपादकीयसंपादकीय
  • कृषिकृषि
  • स्वास्थस्वास्थ
  • रोजगाररोजगार
  • देशदेश
  • विदेशविदेश
  • राज्यराज्य
  • शहरशहर
  • मंडी भावमंडी भाव
  • व्यापारव्यापार
  • धर्मधर्म
  • खेलखेल
  • सुप्रभातसुप्रभात
  • चुनावचुनाव
  • मनोरंजनमनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी समाचारटेक्नोलॉजी समाचार
  • संपादकीयसंपादकीय
  • कृषिकृषि
  • स्वास्थस्वास्थ
  • रोजगाररोजगार
  • होम
  • वीडियो
  • सर्च
  • Contact
  • नहीं रहे पहलाज निहलानी : हिंदी सिनेमा के एक बेबाक चेहरे का अंत

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    नहीं रहे पहलाज निहलानी
    मनोरंजन   - नीमच[04-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मालवांचल मित्र | विशेष लेख

    मुंबई। हिंदी फिल्म उद्योग ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने निर्माता, संगठनकर्ता और सेंसर बोर्ड प्रमुख के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। फिल्म निर्माता और पूर्व केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) अध्यक्ष पहलाज निहलानी के निधन की खबर ने फिल्म जगत में शोक की लहर पैदा कर दी है। उनके जाने के साथ भारतीय सिनेमा का एक ऐसा अध्याय समाप्त हुआ है, जो उपलब्धियों, बहसों और सार्वजनिक चर्चाओं से भरा रहा।

    पहलाज निहलानी उन चुनिंदा लोगों में शामिल थे जिन्होंने केवल फिल्में ही नहीं बनाईं, बल्कि फिल्म उद्योग की दिशा और उससे जुड़े मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय रखी। यही कारण है कि उनका नाम अक्सर फिल्मों से आगे बढ़कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सेंसरशिप और फिल्म उद्योग की नीतियों से जुड़ी चर्चाओं में भी लिया जाता रहा।

    फिल्मों के प्रति जुनून ने दिलाई पहचान

    फिल्म जगत में अपनी जगह बनाना कभी आसान नहीं रहा, लेकिन निहलानी ने मेहनत और व्यावसायिक समझ के दम पर खुद को स्थापित किया। उन्होंने ऐसे समय में फिल्म निर्माण की दुनिया में कदम रखा जब हिंदी सिनेमा तेजी से बदल रहा था और दर्शकों की पसंद भी नए रूप ले रही थी।

    उनकी पहचान ऐसे निर्माता के रूप में बनी जो मनोरंजन को सबसे बड़ी प्राथमिकता मानते थे। उन्होंने ऐसी फिल्मों का निर्माण किया जो आम दर्शकों से सीधे जुड़ती थीं और बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करती थीं।

    सफलता जिसने उन्हें शीर्ष पर पहुंचाया

    1990 के दशक में उनकी पहचान एक सफल निर्माता के रूप में और मजबूत हुई। उनकी फिल्मों ने बड़े पैमाने पर दर्शकों का मनोरंजन किया और उन्हें उद्योग में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया। उस दौर में व्यावसायिक सिनेमा की सफलता का अर्थ था दर्शकों की नब्ज को समझना, और इस मामले में निहलानी को माहिर माना जाता था।

    फिल्म व्यवसाय की बारीकियों को समझने की उनकी क्षमता ने उन्हें लंबे समय तक उद्योग में सक्रिय और प्रासंगिक बनाए रखा।

    निर्माता से उद्योग प्रतिनिधि तक

    फिल्म निर्माण के साथ-साथ उन्होंने उद्योग से जुड़े संगठनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे निर्माताओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बोलते थे और अक्सर उद्योग की समस्याओं को सार्वजनिक मंचों पर उठाते थे।

    उनका मानना था कि फिल्म उद्योग को मजबूत संगठनात्मक नेतृत्व की आवश्यकता है। यही कारण था कि वे लंबे समय तक विभिन्न उद्योग संगठनों से जुड़े रहे और निर्माताओं की आवाज़ के रूप में पहचाने गए।

    जब राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आए

    उनके जीवन का सबसे चर्चित दौर तब शुरू हुआ जब उन्हें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उनके कई फैसले राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने।

    फिल्मों को लेकर उनके दृष्टिकोण ने देशभर में सेंसरशिप और रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर बहस छेड़ दी। कुछ लोगों ने उनके फैसलों का समर्थन किया, जबकि कई फिल्मकारों और कलाकारों ने उनका विरोध भी किया।

    लेकिन एक बात स्पष्ट थी—उन्होंने इस विषय को राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बना दिया।

    विवादों से घिरा लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल

    उनके कार्यकाल के दौरान कई फिल्मों को लेकर विवाद सामने आए। फिल्मों की सामग्री, भाषा और प्रस्तुति को लेकर लिए गए निर्णयों ने लगातार सुर्खियां बटोरीं।

    उनका तर्क था कि फिल्मों का समाज पर प्रभाव पड़ता है और इसलिए कुछ सीमाएं आवश्यक हैं। वहीं दूसरी ओर फिल्म जगत का एक बड़ा वर्ग मानता था कि रचनात्मक अभिव्यक्ति पर अत्यधिक नियंत्रण उचित नहीं है।

    यही मतभेद उनके कार्यकाल को भारतीय फिल्म इतिहास के सबसे चर्चित दौरों में से एक बनाते हैं।

    स्पष्टवादिता थी उनकी पहचान

    पहलाज निहलानी को उनके स्पष्ट और बेबाक स्वभाव के लिए भी जाना जाता था। वे अपनी बात बिना किसी झिझक के रखते थे, चाहे सामने कोई भी हो।

    उनके बयान कई बार विवादों का कारण बने, लेकिन उन्होंने शायद ही कभी अपने विचारों को सार्वजनिक रूप से रखने से परहेज किया हो। यही गुण उन्हें समर्थकों और आलोचकों दोनों के बीच चर्चा का विषय बनाए रखता था।

    भारतीय सिनेमा में उनकी जगह

    पहलाज निहलानी का योगदान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था। उन्होंने उस बहस को भी आकार दिया जो आज भी भारतीय सिनेमा में जारी है—फिल्मों की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन की बहस।

    उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि फिल्म उद्योग में प्रभाव केवल कैमरे के सामने या पर्दे पर ही नहीं बनता, बल्कि नीतियों, विचारों और नेतृत्व के माध्यम से भी स्थापित किया जा सकता है।

    एक युग का अंत

    उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है जिसने कई दशकों तक किसी न किसी रूप में उद्योग को प्रभावित किया। उनकी उपलब्धियों, उनके विचारों और उनके विवादों पर चर्चा आगे भी होती रहेगी।

    आज जब फिल्म जगत उन्हें याद कर रहा है, तब यह भी याद किया जा रहा है कि उन्होंने अपने तरीके से भारतीय सिनेमा की कहानी को प्रभावित किया। उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए फिल्म उद्योग के बदलते स्वरूप का एक महत्वपूर्ण अध्याय बनकर रहेगा।

    — मालवांचल मित्र डेस्क



  • नहीं रहे पहलाज निहलानी : हिंदी सिनेमा के एक बेबाक चेहरे का अंत

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    नहीं रहे पहलाज निहलानी
    मनोरंजन   - नीमच[04-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp

    मालवांचल मित्र | विशेष लेख

    मुंबई। हिंदी फिल्म उद्योग ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने निर्माता, संगठनकर्ता और सेंसर बोर्ड प्रमुख के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। फिल्म निर्माता और पूर्व केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) अध्यक्ष पहलाज निहलानी के निधन की खबर ने फिल्म जगत में शोक की लहर पैदा कर दी है। उनके जाने के साथ भारतीय सिनेमा का एक ऐसा अध्याय समाप्त हुआ है, जो उपलब्धियों, बहसों और सार्वजनिक चर्चाओं से भरा रहा।

    पहलाज निहलानी उन चुनिंदा लोगों में शामिल थे जिन्होंने केवल फिल्में ही नहीं बनाईं, बल्कि फिल्म उद्योग की दिशा और उससे जुड़े मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय रखी। यही कारण है कि उनका नाम अक्सर फिल्मों से आगे बढ़कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सेंसरशिप और फिल्म उद्योग की नीतियों से जुड़ी चर्चाओं में भी लिया जाता रहा।

    फिल्मों के प्रति जुनून ने दिलाई पहचान

    फिल्म जगत में अपनी जगह बनाना कभी आसान नहीं रहा, लेकिन निहलानी ने मेहनत और व्यावसायिक समझ के दम पर खुद को स्थापित किया। उन्होंने ऐसे समय में फिल्म निर्माण की दुनिया में कदम रखा जब हिंदी सिनेमा तेजी से बदल रहा था और दर्शकों की पसंद भी नए रूप ले रही थी।

    उनकी पहचान ऐसे निर्माता के रूप में बनी जो मनोरंजन को सबसे बड़ी प्राथमिकता मानते थे। उन्होंने ऐसी फिल्मों का निर्माण किया जो आम दर्शकों से सीधे जुड़ती थीं और बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करती थीं।

    सफलता जिसने उन्हें शीर्ष पर पहुंचाया

    1990 के दशक में उनकी पहचान एक सफल निर्माता के रूप में और मजबूत हुई। उनकी फिल्मों ने बड़े पैमाने पर दर्शकों का मनोरंजन किया और उन्हें उद्योग में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया। उस दौर में व्यावसायिक सिनेमा की सफलता का अर्थ था दर्शकों की नब्ज को समझना, और इस मामले में निहलानी को माहिर माना जाता था।

    फिल्म व्यवसाय की बारीकियों को समझने की उनकी क्षमता ने उन्हें लंबे समय तक उद्योग में सक्रिय और प्रासंगिक बनाए रखा।

    निर्माता से उद्योग प्रतिनिधि तक

    फिल्म निर्माण के साथ-साथ उन्होंने उद्योग से जुड़े संगठनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे निर्माताओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बोलते थे और अक्सर उद्योग की समस्याओं को सार्वजनिक मंचों पर उठाते थे।

    उनका मानना था कि फिल्म उद्योग को मजबूत संगठनात्मक नेतृत्व की आवश्यकता है। यही कारण था कि वे लंबे समय तक विभिन्न उद्योग संगठनों से जुड़े रहे और निर्माताओं की आवाज़ के रूप में पहचाने गए।

    जब राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आए

    उनके जीवन का सबसे चर्चित दौर तब शुरू हुआ जब उन्हें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उनके कई फैसले राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने।

    फिल्मों को लेकर उनके दृष्टिकोण ने देशभर में सेंसरशिप और रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर बहस छेड़ दी। कुछ लोगों ने उनके फैसलों का समर्थन किया, जबकि कई फिल्मकारों और कलाकारों ने उनका विरोध भी किया।

    लेकिन एक बात स्पष्ट थी—उन्होंने इस विषय को राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बना दिया।

    विवादों से घिरा लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल

    उनके कार्यकाल के दौरान कई फिल्मों को लेकर विवाद सामने आए। फिल्मों की सामग्री, भाषा और प्रस्तुति को लेकर लिए गए निर्णयों ने लगातार सुर्खियां बटोरीं।

    उनका तर्क था कि फिल्मों का समाज पर प्रभाव पड़ता है और इसलिए कुछ सीमाएं आवश्यक हैं। वहीं दूसरी ओर फिल्म जगत का एक बड़ा वर्ग मानता था कि रचनात्मक अभिव्यक्ति पर अत्यधिक नियंत्रण उचित नहीं है।

    यही मतभेद उनके कार्यकाल को भारतीय फिल्म इतिहास के सबसे चर्चित दौरों में से एक बनाते हैं।

    स्पष्टवादिता थी उनकी पहचान

    पहलाज निहलानी को उनके स्पष्ट और बेबाक स्वभाव के लिए भी जाना जाता था। वे अपनी बात बिना किसी झिझक के रखते थे, चाहे सामने कोई भी हो।

    उनके बयान कई बार विवादों का कारण बने, लेकिन उन्होंने शायद ही कभी अपने विचारों को सार्वजनिक रूप से रखने से परहेज किया हो। यही गुण उन्हें समर्थकों और आलोचकों दोनों के बीच चर्चा का विषय बनाए रखता था।

    भारतीय सिनेमा में उनकी जगह

    पहलाज निहलानी का योगदान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था। उन्होंने उस बहस को भी आकार दिया जो आज भी भारतीय सिनेमा में जारी है—फिल्मों की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन की बहस।

    उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि फिल्म उद्योग में प्रभाव केवल कैमरे के सामने या पर्दे पर ही नहीं बनता, बल्कि नीतियों, विचारों और नेतृत्व के माध्यम से भी स्थापित किया जा सकता है।

    एक युग का अंत

    उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है जिसने कई दशकों तक किसी न किसी रूप में उद्योग को प्रभावित किया। उनकी उपलब्धियों, उनके विचारों और उनके विवादों पर चर्चा आगे भी होती रहेगी।

    आज जब फिल्म जगत उन्हें याद कर रहा है, तब यह भी याद किया जा रहा है कि उन्होंने अपने तरीके से भारतीय सिनेमा की कहानी को प्रभावित किया। उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए फिल्म उद्योग के बदलते स्वरूप का एक महत्वपूर्ण अध्याय बनकर रहेगा।

    — मालवांचल मित्र डेस्क

  • नहीं रहे पहलाज निहलानी: हिंदी सिनेमा के एक बेबाक चेहरे का अंत

    नहीं रहे पहलाज निहलानी:
    मनोरंजन   - नीमच[04-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • नहीं रहे पहलाज निहलानी: हिंदी सिनेमा के एक बेबाक चेहरे का अंत

     हिंदी सिनेमा के एक बेबाक चेहरे का अंत
    मनोरंजन   - नीमच[04-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: छह दशक तक सुरों से दिलों पर राज करने वालीं सुमन कल्याणपुर नहीं रहीं, 89 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

    मनोरंजन:
    मनोरंजन   - नीमच[01-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: छह दशक तक सुरों से दिलों पर राज करने वालीं सुमन कल्याणपुर नहीं रहीं, 89 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

    छह दशक तक सुरों से दिलों पर राज करने वालीं सुमन कल्याणपुर नहीं रहीं, 89 वर्ष की उम्र में हुआ निधन
    मनोरंजन   - नीमच[01-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: दुनिया की सबसे खूबसूरत महारानी को जेल क्यों भेजा गया? | Gayatri Devi Story

    मनोरंजन:
    मनोरंजन   - नीमच[23-05-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: दुनिया की सबसे खूबसूरत महारानी को जेल क्यों भेजा गया? | Gayatri Devi Story

    दुनिया की सबसे खूबसूरत महारानी को जेल क्यों भेजा गया? | Gayatri Devi Story
    मनोरंजन   - नीमच[23-05-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • बॉलीवुड गपशप: ‘आखिरी सवाल’ पर सेंसर की कैंची या इंतज़ार की सस्पेंस स्टोरी?

    बॉलीवुड गपशप:
    मनोरंजन   - नीमच[07-05-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • बॉलीवुड गपशप: ‘आखिरी सवाल’ पर सेंसर की कैंची या इंतज़ार की सस्पेंस स्टोरी?

     ‘आखिरी सवाल’ पर सेंसर की कैंची या इंतज़ार की सस्पेंस स्टोरी?
    मनोरंजन   - नीमच[07-05-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: Raj Kapoor का राज | क्या उनकी लाइफ ही उनकी फिल्मों की कहानी थी? | राज और नरगिस की कहानी क्या थी?

    मनोरंजन:
    मनोरंजन   - नीमच[04-04-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: Raj Kapoor का राज | क्या उनकी लाइफ ही उनकी फिल्मों की कहानी थी? | राज और नरगिस की कहानी क्या थी?

    Raj Kapoor का राज | क्या  उनकी लाइफ ही उनकी फिल्मों की कहानी थी? | राज और नरगिस की कहानी क्या थी?
    मनोरंजन   - नीमच[04-04-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: ‘धुरंधर 2’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार, थिएटर में आम दर्शक बनकर पहुंचे आर माधवन — वीडियो वायरल

    मनोरंजन:
    मनोरंजन   - नीमच[03-04-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: ‘धुरंधर 2’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार, थिएटर में आम दर्शक बनकर पहुंचे आर माधवन — वीडियो वायरल

    ‘धुरंधर 2’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार, थिएटर में आम दर्शक बनकर पहुंचे आर माधवन — वीडियो वायरल
    मनोरंजन   - नीमच[03-04-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: ऐ मेरे वतन के लोगों” सुनकर रो पड़े थे Jawaharlal Nehru | Lata Mangeshkar की ऐतिहासिक प्रस्तुति

    मनोरंजन:
    मनोरंजन   - नीमच[05-03-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: ऐ मेरे वतन के लोगों” सुनकर रो पड़े थे Jawaharlal Nehru | Lata Mangeshkar की ऐतिहासिक प्रस्तुति

    ऐ मेरे वतन के लोगों” सुनकर रो पड़े थे Jawaharlal Nehru | Lata Mangeshkar की ऐतिहासिक प्रस्तुति
    मनोरंजन   - नीमच[05-03-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज़ पर रोक: केरल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सेंसर बोर्ड को दोबारा समीक्षा के निर्देश

    ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज़ पर रोक:
    मनोरंजन   - नीमच[27-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज़ पर रोक: केरल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सेंसर बोर्ड को दोबारा समीक्षा के निर्देश

     केरल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सेंसर बोर्ड को दोबारा समीक्षा के निर्देश
    मनोरंजन   - नीमच[27-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: Today in History| साहित्य की हर विधा में पारंगत थे विष्णु वामन शिरवाडकर (कुसुमाग्रज) | जन्मदिन विशेष

    मनोरंजन:
    मनोरंजन   - नीमच[27-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: Today in History| साहित्य की हर विधा में पारंगत थे विष्णु वामन शिरवाडकर (कुसुमाग्रज) | जन्मदिन विशेष

    Today in History| साहित्य की हर विधा में पारंगत थे विष्णु वामन शिरवाडकर (कुसुमाग्रज) | जन्मदिन विशेष
    मनोरंजन   - नीमच[27-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: Kishore Kumar Biography in Hindi | योडलिंग, मस्ती और अनसुने किस्से!

    मनोरंजन:
    मनोरंजन   - नीमच[25-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: Kishore Kumar Biography in Hindi | योडलिंग, मस्ती और अनसुने किस्से!

     Kishore Kumar Biography in Hindi | योडलिंग, मस्ती और अनसुने किस्से!
    मनोरंजन   - नीमच[25-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • 24 फरवरी 2018: जब थम गई एक चमकती सितारा ज़िंदगी

    24 फरवरी 2018:
    मनोरंजन   - नीमच[24-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • 24 फरवरी 2018: जब थम गई एक चमकती सितारा ज़िंदगी

     जब थम गई एक चमकती सितारा ज़िंदगी
    मनोरंजन   - नीमच[24-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: Today in History - दादा साहब फाल्के पुण्य तिथि | भारत की पहली फिल्म कैसे बनी? | दादासाहेब फाल्के की प्रेरक कहानी

    मनोरंजन:
    मनोरंजन   - नीमच[16-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: Today in History - दादा साहब फाल्के पुण्य तिथि | भारत की पहली फिल्म कैसे बनी? | दादासाहेब फाल्के की प्रेरक कहानी

    Today in History - दादा साहब फाल्के पुण्य तिथि | भारत की पहली फिल्म कैसे बनी? | दादासाहेब फाल्के की प्रेरक कहानी
    मनोरंजन   - नीमच[16-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • Popcorn Talk: 6 साल की चुप्पी! रॉयल्टी विवाद में आमने-सामने आए Mohammed Rafi और Lata Mangeshkar | अनसुना किस्सा

    Popcorn Talk:
    मनोरंजन   - नीमच[14-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • Popcorn Talk: 6 साल की चुप्पी! रॉयल्टी विवाद में आमने-सामने आए Mohammed Rafi और Lata Mangeshkar | अनसुना किस्सा

     6 साल की चुप्पी! रॉयल्टी विवाद में आमने-सामने आए Mohammed Rafi और Lata Mangeshkar | अनसुना किस्सा
    मनोरंजन   - नीमच[14-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: नीमच के सुरों की कहानी | दो पीढ़ियों का संगीत सफर

    मनोरंजन:
    मनोरंजन   - नीमच[11-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मनोरंजन: नीमच के सुरों की कहानी | दो पीढ़ियों का संगीत सफर

    नीमच के सुरों की कहानी | दो पीढ़ियों का संगीत सफर
    मनोरंजन   - नीमच[11-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • Comedy King Mehmood Untold Story: हँसी, अफेयर, तलाक और पछतावे की पूरी सच्चाई

    Comedy King Mehmood Untold Story:
    मनोरंजन   - नीमच[08-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • Comedy King Mehmood Untold Story: हँसी, अफेयर, तलाक और पछतावे की पूरी सच्चाई

     हँसी, अफेयर, तलाक और पछतावे की पूरी सच्चाई
    मनोरंजन   - नीमच[08-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • LoginLogin