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नीमच। महर्षि वाल्मीकि त्रिकाल दृष्टा थे। उन्होंने रामायण की रचना राम जन्म से पहले ही कर दी थी। यह कहना था साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी का। उन्होंने कहा कि भगवान वाल्मीकि का महाकाव्य रामायण भारतीय संस्कृति को अनमोल उपहार है। अजय जिंदल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि आदि कवि थे। उन्होंने भगवान राम के पुत्रों लव और कुश को शिक्षित और संस्कारित किया। वाल्मीकि जयंती पर कार्यक्रम के प्रारम्भ में फव्वारा चौक स्थित महर्षि की प्रतिमा पर परिषद के सदस्यों व साहित्य प्रेमियों द्वारा माल्यर्पण किया गया। इस अवसर पर महिपाल सिंह चौहान, कैलाश बाहेती, दिनेश मनावत, कमलेश जायसवाल, गणेश खंडेलवाल, भरत जाजू, जगमोहन कटारिया, गोविंद जी पोरवाल आदि उपस्थित थे।आभार परिषद के महासचिव अम्बिका प्रसाद जोशी ने व्यक्त किया। |
नीमच। महर्षि वाल्मीकि त्रिकाल दृष्टा थे। उन्होंने रामायण की रचना राम जन्म से पहले ही कर दी थी। यह कहना था साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी का। उन्होंने कहा कि भगवान वाल्मीकि का महाकाव्य रामायण भारतीय संस्कृति को अनमोल उपहार है। अजय जिंदल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि आदि कवि थे। उन्होंने भगवान राम के पुत्रों लव और कुश को शिक्षित और संस्कारित किया।
वाल्मीकि जयंती पर कार्यक्रम के प्रारम्भ में फव्वारा चौक स्थित महर्षि की प्रतिमा पर परिषद के सदस्यों व साहित्य प्रेमियों द्वारा माल्यर्पण किया गया। इस अवसर पर महिपाल सिंह चौहान, कैलाश बाहेती, दिनेश मनावत, कमलेश जायसवाल, गणेश खंडेलवाल, भरत जाजू, जगमोहन कटारिया, गोविंद जी पोरवाल आदि उपस्थित थे।आभार परिषद के महासचिव अम्बिका प्रसाद जोशी ने व्यक्त किया।