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डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति Foreign Accent Syndrome (FAS) या न्यूरोलॉजिकल लैंग्वेज डिसऑर्डर से जुड़ी हो सकती है। सर्जरी या ब्रेन इंजरी के दौरान दिमाग के उस हिस्से पर असर पड़ सकता है, जो भाषा और उच्चारण को नियंत्रित करता है। इससे व्यक्ति की आवाज़, लहजा या कभी-कभी पूरी भाषा ही बदल जाती है।
कुछ मामलों में मरीज को पहले सुनी या सीखी गई विदेशी भाषा अचानक अधिक सुलभ लगने लगती है, जबकि उसकी मूल भाषा प्रभावित हो जाती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह दिमाग की यादों और भाषा से जुड़े नेटवर्क के पुनर्गठन (री-ऑर्गनाइजेशन) का परिणाम हो सकता है।
दुनिया भर में अब तक ऐसे बहुत कम मामले दर्ज किए गए हैं। यही कारण है कि यह घटना मेडिकल जगत में खास दिलचस्पी का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही थेरेपी और स्पीच ट्रेनिंग से कई मरीज धीरे-धीरे अपनी मूल भाषा दोबारा सीख लेते हैं।
साल 2016 में अमेरिका के रहने वाले रूबेन नसेमोह (Reuben Nsemoh) नाम के एक फुटबॉल खिलाड़ी को सिर में चोट लगी थी। जब वे कोमा से जागे, तो वे अपनी मातृभाषा अंग्रेजी भूल चुके थे और फर्राटेदार स्पेनिश बोल रहे थे, जबकि उन्हें पहले स्पेनिश नहीं आती थी। धीरे-धीरे उनकी अंग्रेजी वापस आई और स्पेनिश बोलने की क्षमता कम हो गई।
यह मामला साबित करता है कि मानव मस्तिष्क अब भी रहस्यों से भरा हुआ है। एक छोटी-सी सर्जरी भी भाषा, पहचान और व्यक्तित्व में बड़ा बदलाव ला सकती है। ऐसे केस भविष्य में ब्रेन रिसर्च और भाषा विज्ञान के लिए नई दिशा खोल सकते हैं।