• विदेश : ट्रंप प्रशासन ने भारत-चीन समेत 16 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ शुरू की व्यापार जांच, सेक्शन 301 के तहत कार्रवाई की तैयारी

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    विदेश
    विदेश   - नीमच[12-03-2026]
  • मालवांचल मित्र, वॉशिंगटन/अमेरिका: अमेरिका में व्यापार नीति को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने भारत, चीन और यूरोपियन यूनियन सहित दुनिया की 16 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। इन देशों पर आरोप लगाया गया है कि वे वैश्विक मांग से अधिक उत्पादन कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ते दामों पर सामान बेचते हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों और रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के पहले के टैरिफ प्रोग्राम को अवैध ठहराया था। ऐसे में यह कार्रवाई ट्रंप की वैश्विक टैरिफ रणनीति को नए तरीके से फिर शुरू करने की कोशिश मानी जा रही है।

    सेक्शन 301 के तहत दो अलग-अलग जांच

    अमेरिकी सरकार के व्यापार विभाग United States Trade Representative (USTR) के कार्यालय ने Trade Act 1974 के Section 301 के तहत दो अलग-अलग जांच शुरू करने की घोषणा की है।

    पहली जांच में यह देखा जाएगा कि क्या कुछ प्रमुख व्यापारिक साझेदार देश औद्योगिक उत्पादन की क्षमता को वास्तविक वैश्विक मांग से अधिक बढ़ा रहे हैं। दूसरी जांच उन उत्पादों पर केंद्रित होगी जिनके बारे में आरोप है कि वे कम मजदूरी और श्रमिकों से लंबे समय तक काम लेकर तैयार किए जाते हैं।

    अमेरिकी उद्योग और नौकरियों की सुरक्षा पर जोर

    अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव Jamieson Greer ने कहा कि इस जांच का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों की नीतियां वैश्विक बाजार में असंतुलन पैदा कर रही हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो रहा है।

    उनके अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो अमेरिका इन देशों के खिलाफ टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठा सकता है।

    किन-किन देशों को किया गया जांच के दायरे में शामिल

    इस जांच में भारत और चीन के अलावा कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। इनमें यूरोपियन यूनियन, जापान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं।

    अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों में मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट कई मामलों में वास्तविक बाजार मांग से कहीं अधिक दिखाई देता है।

    अमेरिका के आरोप: सब्सिडी और कम मजदूरी से बढ़ता उत्पादन

    अमेरिका का आरोप है कि भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं सरकारी सब्सिडी, सस्ती ऊर्जा और कम मजदूरी जैसी नीतियों के जरिए उत्पादन लागत को कम करती हैं। इससे कंपनियां वैश्विक मांग से ज्यादा उत्पादन करती हैं।

    जब यह अतिरिक्त उत्पाद घरेलू बाजार में नहीं बिक पाते, तो इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कम कीमत पर निर्यात किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इससे अमेरिकी उद्योगों को नुकसान होता है और घरेलू रोजगार पर दबाव बढ़ता है।

    वैश्विक व्यापार में बढ़ सकता है तनाव

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच के बाद अमेरिका टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लागू करता है तो इससे वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ सकता है। खासतौर पर भारत और चीन जैसे देशों के साथ व्यापारिक संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।

    हालांकि कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन के मौजूदा दौर में इस तरह के कदम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता भी पैदा कर सकते हैं।

    आगे क्या हो सकता है

    फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। आने वाले महीनों में इसके निष्कर्ष सामने आ सकते हैं। यदि अमेरिका को व्यापारिक असंतुलन या अनुचित नीतियों के सबूत मिलते हैं, तो वह टैरिफ बढ़ाने या अन्य आर्थिक उपाय लागू करने का फैसला ले सकता है।

    यह जांच आने वाले समय में वैश्विक व्यापार नीति और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों के लिए अहम साबित हो सकती है।



  • विदेश : ट्रंप प्रशासन ने भारत-चीन समेत 16 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ शुरू की व्यापार जांच, सेक्शन 301 के तहत कार्रवाई की तैयारी

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    विदेश
    विदेश   - नीमच[12-03-2026]

    मालवांचल मित्र, वॉशिंगटन/अमेरिका: अमेरिका में व्यापार नीति को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने भारत, चीन और यूरोपियन यूनियन सहित दुनिया की 16 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। इन देशों पर आरोप लगाया गया है कि वे वैश्विक मांग से अधिक उत्पादन कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ते दामों पर सामान बेचते हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों और रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के पहले के टैरिफ प्रोग्राम को अवैध ठहराया था। ऐसे में यह कार्रवाई ट्रंप की वैश्विक टैरिफ रणनीति को नए तरीके से फिर शुरू करने की कोशिश मानी जा रही है।

    सेक्शन 301 के तहत दो अलग-अलग जांच

    अमेरिकी सरकार के व्यापार विभाग United States Trade Representative (USTR) के कार्यालय ने Trade Act 1974 के Section 301 के तहत दो अलग-अलग जांच शुरू करने की घोषणा की है।

    पहली जांच में यह देखा जाएगा कि क्या कुछ प्रमुख व्यापारिक साझेदार देश औद्योगिक उत्पादन की क्षमता को वास्तविक वैश्विक मांग से अधिक बढ़ा रहे हैं। दूसरी जांच उन उत्पादों पर केंद्रित होगी जिनके बारे में आरोप है कि वे कम मजदूरी और श्रमिकों से लंबे समय तक काम लेकर तैयार किए जाते हैं।

    अमेरिकी उद्योग और नौकरियों की सुरक्षा पर जोर

    अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव Jamieson Greer ने कहा कि इस जांच का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों की नीतियां वैश्विक बाजार में असंतुलन पैदा कर रही हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो रहा है।

    उनके अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो अमेरिका इन देशों के खिलाफ टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठा सकता है।

    किन-किन देशों को किया गया जांच के दायरे में शामिल

    इस जांच में भारत और चीन के अलावा कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। इनमें यूरोपियन यूनियन, जापान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं।

    अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों में मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट कई मामलों में वास्तविक बाजार मांग से कहीं अधिक दिखाई देता है।

    अमेरिका के आरोप: सब्सिडी और कम मजदूरी से बढ़ता उत्पादन

    अमेरिका का आरोप है कि भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं सरकारी सब्सिडी, सस्ती ऊर्जा और कम मजदूरी जैसी नीतियों के जरिए उत्पादन लागत को कम करती हैं। इससे कंपनियां वैश्विक मांग से ज्यादा उत्पादन करती हैं।

    जब यह अतिरिक्त उत्पाद घरेलू बाजार में नहीं बिक पाते, तो इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कम कीमत पर निर्यात किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इससे अमेरिकी उद्योगों को नुकसान होता है और घरेलू रोजगार पर दबाव बढ़ता है।

    वैश्विक व्यापार में बढ़ सकता है तनाव

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच के बाद अमेरिका टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लागू करता है तो इससे वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ सकता है। खासतौर पर भारत और चीन जैसे देशों के साथ व्यापारिक संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।

    हालांकि कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन के मौजूदा दौर में इस तरह के कदम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता भी पैदा कर सकते हैं।

    आगे क्या हो सकता है

    फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। आने वाले महीनों में इसके निष्कर्ष सामने आ सकते हैं। यदि अमेरिका को व्यापारिक असंतुलन या अनुचित नीतियों के सबूत मिलते हैं, तो वह टैरिफ बढ़ाने या अन्य आर्थिक उपाय लागू करने का फैसला ले सकता है।

    यह जांच आने वाले समय में वैश्विक व्यापार नीति और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों के लिए अहम साबित हो सकती है।