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मालवांचल मित्र, नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के तहत आज (शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026) लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा जारी है, जिन पर शाम 4 बजे मतदान होगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस संबंध में जानकारी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को लोकसभा में आश्वासन दिया कि महिलाओं के आरक्षण कानून में संशोधन और नए परिसीमन (डिलिमिटेशन) के बाद भी दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित नहीं होगा। अमित शाह ने कहा कि दक्षिण भारत के पांच राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 129 से बढ़कर 195 हो जाएगी और उनका प्रतिशत हिस्सा 23.76% से बढ़कर 23.87% हो जाएगा। इसी बीच, महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को 16 अप्रैल 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी की गई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि संसद में इस कानून में संशोधन पर चर्चा के बीच इसे लागू क्यों किया गया। विपक्ष ने उठाए सवाल डीएमके सांसद कनिमोझी ने सरकार से सवाल किया कि महिला आरक्षण अधिनियम को अभी लागू करने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक संघीय ढांचे को कमजोर कर सकता है। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार से अपील की कि वह इस विधेयक को वापस लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जा सकता है। INDIA गठबंधन की बैठक INDIA गठबंधन के सांसद आज सुबह 10 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में बैठक कर संसद में अपनी रणनीति तय करेंगे। तीन प्रमुख विधेयकों पर चर्चा लोकसभा में जिन विधेयकों पर चर्चा और मतदान होना है, वे हैं:
परिसीमन पर भी विवाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने कहा कि परिसीमन से अल्पसंख्यकों की राजनीतिक शक्ति कम हो सकती है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मांग की कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले जातीय जनगणना कराई जाए। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री से मांग की कि अगले 25 वर्षों तक परिसीमन 1971 की जनसंख्या के आधार पर ही किया जाए। महिला सांसदों की प्रतिक्रिया विभिन्न दलों की महिला सांसदों ने महिला आरक्षण का स्वागत किया, लेकिन इसके “राजनीतिक इस्तेमाल” को लेकर चिंता भी जताई। सरकार का कहना है कि परिसीमन के बाद सभी राज्यों की सीटों में लगभग 50% की वृद्धि होगी, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संतुलन के लिए चुनौतीपूर्ण मान रहा है। |
मालवांचल मित्र, नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के तहत आज (शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026) लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा जारी है, जिन पर शाम 4 बजे मतदान होगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस संबंध में जानकारी दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को लोकसभा में आश्वासन दिया कि महिलाओं के आरक्षण कानून में संशोधन और नए परिसीमन (डिलिमिटेशन) के बाद भी दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित नहीं होगा। अमित शाह ने कहा कि दक्षिण भारत के पांच राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 129 से बढ़कर 195 हो जाएगी और उनका प्रतिशत हिस्सा 23.76% से बढ़कर 23.87% हो जाएगा।
इसी बीच, महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को 16 अप्रैल 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी की गई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि संसद में इस कानून में संशोधन पर चर्चा के बीच इसे लागू क्यों किया गया।
विपक्ष ने उठाए सवाल
डीएमके सांसद कनिमोझी ने सरकार से सवाल किया कि महिला आरक्षण अधिनियम को अभी लागू करने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक संघीय ढांचे को कमजोर कर सकता है।
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार से अपील की कि वह इस विधेयक को वापस लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जा सकता है।
INDIA गठबंधन की बैठक
INDIA गठबंधन के सांसद आज सुबह 10 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में बैठक कर संसद में अपनी रणनीति तय करेंगे।
तीन प्रमुख विधेयकों पर चर्चा
लोकसभा में जिन विधेयकों पर चर्चा और मतदान होना है, वे हैं:
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 (महिलाओं को 33% आरक्षण)
केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में लागू)
परिसीमन विधेयक (लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक करने का प्रस्ताव)
परिसीमन पर भी विवाद
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने कहा कि परिसीमन से अल्पसंख्यकों की राजनीतिक शक्ति कम हो सकती है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मांग की कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले जातीय जनगणना कराई जाए।
वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री से मांग की कि अगले 25 वर्षों तक परिसीमन 1971 की जनसंख्या के आधार पर ही किया जाए।
महिला सांसदों की प्रतिक्रिया
विभिन्न दलों की महिला सांसदों ने महिला आरक्षण का स्वागत किया, लेकिन इसके “राजनीतिक इस्तेमाल” को लेकर चिंता भी जताई।
सरकार का कहना है कि परिसीमन के बाद सभी राज्यों की सीटों में लगभग 50% की वृद्धि होगी, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संतुलन के लिए चुनौतीपूर्ण मान रहा है।