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  • शहर : प्रशासनिक अधिकारियों को रील संस्कृति से बचना चाहिए — रमेशचन्द्र चन्द्रे

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    शहर
    शहर   - नीमच[28-05-2026]
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  • मालवांचल मित्र, (रमेशचन्द्र चन्द्रे):  देश में शासन की समस्त योजनाओं का क्रियान्वयन प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से होता है। ऐसे में उनकी कार्यशैली, व्यवहार और सार्वजनिक छवि समाज पर गहरा प्रभाव डालती है। यदि कोई अधिकारी सरकारी योजनाओं की जानकारी देने अथवा जनकल्याण के उद्देश्य से वीडियो या रील बनाता है, तो वह सराहनीय हो सकता है। किंतु जब रीलें व्यक्तिगत लोकप्रियता, प्रशंसा या सोशल मीडिया प्रसिद्धि प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाई जाने लगती हैं, तब यह स्थिति प्रशासनिक गरिमा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।

    आज सोशल मीडिया का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया है। कई प्रशासनिक अधिकारी, विशेषकर महिला अधिकारी, व्यक्तिगत जीवनशैली अथवा आकर्षक प्रस्तुतियों पर आधारित रीलें बनाकर प्रसारित कर रही हैं। भले ही उनका उद्देश्य सकारात्मक हो, लेकिन समाज का एक वर्ग इसे अलग दृष्टि से देखने लगता है। सोशल मीडिया पर होने वाले भद्दे कमेंट, व्यक्तिगत टिप्पणियां और चरित्र पर सवाल महिला अधिकारियों के लिए मानसिक दबाव का कारण बनते हैं। इससे अन्य महिला अधिकारी भी हतोत्साहित होती हैं।

    प्रशासनिक पद केवल आकर्षक व्यक्तित्व या लोकप्रियता के लिए नहीं होता। यह जिम्मेदारी, अनुशासन और नेतृत्व का पद है। जनता अधिकारी में गंभीरता, निष्पक्षता और कार्यक्षमता देखना चाहती है। जब कोई अधिकारी कैमरे और सोशल मीडिया पर अत्यधिक केंद्रित दिखाई देता है, तब लोगों को यह महसूस होने लगता है कि अधिकारी अपने मूल कर्तव्यों से अधिक प्रचार पर ध्यान दे रहा है।

    कई बार जनता यह मान लेती है कि रील बनाने वाला अधिकारी जमीन से जुड़ा हुआ है और भारतीय संस्कृति को समझता है, किंतु दूसरी ओर यह धारणा भी बनती है कि ऐसे अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र की वास्तविक समस्याओं से दूर होकर कैमरे की दुनिया में अधिक व्यस्त हैं। इसका परिणाम यह होता है कि लोग उनकी प्रशासनिक कमजोरियों को पहचानने लगते हैं और अधिकारी स्वयं भी अपने मूल उद्देश्य से भटक सकते हैं।

    आईएएस, आईपीएस सहित सभी प्रशासनिक अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि उन्हें यह पद उनकी योग्यता, मेहनत और क्षमता के आधार पर प्राप्त हुआ है, न कि सुंदरता या सोशल मीडिया लोकप्रियता के कारण। प्रशासनिक अधिकारी समाज, कर्मचारियों और युवाओं के लिए रोल मॉडल होते हैं। इसलिए उन्हें अपनी गरिमा और पद की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।

    यदि कैमरे में आने की महत्वाकांक्षा अत्यधिक बढ़ जाए, तो व्यक्ति अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक सकता है। यह न तो अधिकारी के लिए हितकारी है और न ही सरकार एवं समाज के लिए। सरकार भी सामान्यतः उन्हीं अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपती है, जिनकी छवि गंभीर, कार्यकुशल और संतुलित होती है।

    अतः प्रशासनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत रील संस्कृति से बचते हुए अपने कर्तव्यों, जनसेवा और प्रशासनिक दक्षता पर अधिक ध्यान देना चाहिए। यही उनकी वास्तविक पहचान और सम्मान का आधार होना चाहिए।

    — रमेशचन्द्र चन्द्रे



  • शहर : प्रशासनिक अधिकारियों को रील संस्कृति से बचना चाहिए — रमेशचन्द्र चन्द्रे

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    शहर
    शहर   - नीमच[28-05-2026]
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    मालवांचल मित्र, (रमेशचन्द्र चन्द्रे):  देश में शासन की समस्त योजनाओं का क्रियान्वयन प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से होता है। ऐसे में उनकी कार्यशैली, व्यवहार और सार्वजनिक छवि समाज पर गहरा प्रभाव डालती है। यदि कोई अधिकारी सरकारी योजनाओं की जानकारी देने अथवा जनकल्याण के उद्देश्य से वीडियो या रील बनाता है, तो वह सराहनीय हो सकता है। किंतु जब रीलें व्यक्तिगत लोकप्रियता, प्रशंसा या सोशल मीडिया प्रसिद्धि प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाई जाने लगती हैं, तब यह स्थिति प्रशासनिक गरिमा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।

    आज सोशल मीडिया का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया है। कई प्रशासनिक अधिकारी, विशेषकर महिला अधिकारी, व्यक्तिगत जीवनशैली अथवा आकर्षक प्रस्तुतियों पर आधारित रीलें बनाकर प्रसारित कर रही हैं। भले ही उनका उद्देश्य सकारात्मक हो, लेकिन समाज का एक वर्ग इसे अलग दृष्टि से देखने लगता है। सोशल मीडिया पर होने वाले भद्दे कमेंट, व्यक्तिगत टिप्पणियां और चरित्र पर सवाल महिला अधिकारियों के लिए मानसिक दबाव का कारण बनते हैं। इससे अन्य महिला अधिकारी भी हतोत्साहित होती हैं।

    प्रशासनिक पद केवल आकर्षक व्यक्तित्व या लोकप्रियता के लिए नहीं होता। यह जिम्मेदारी, अनुशासन और नेतृत्व का पद है। जनता अधिकारी में गंभीरता, निष्पक्षता और कार्यक्षमता देखना चाहती है। जब कोई अधिकारी कैमरे और सोशल मीडिया पर अत्यधिक केंद्रित दिखाई देता है, तब लोगों को यह महसूस होने लगता है कि अधिकारी अपने मूल कर्तव्यों से अधिक प्रचार पर ध्यान दे रहा है।

    कई बार जनता यह मान लेती है कि रील बनाने वाला अधिकारी जमीन से जुड़ा हुआ है और भारतीय संस्कृति को समझता है, किंतु दूसरी ओर यह धारणा भी बनती है कि ऐसे अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र की वास्तविक समस्याओं से दूर होकर कैमरे की दुनिया में अधिक व्यस्त हैं। इसका परिणाम यह होता है कि लोग उनकी प्रशासनिक कमजोरियों को पहचानने लगते हैं और अधिकारी स्वयं भी अपने मूल उद्देश्य से भटक सकते हैं।

    आईएएस, आईपीएस सहित सभी प्रशासनिक अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि उन्हें यह पद उनकी योग्यता, मेहनत और क्षमता के आधार पर प्राप्त हुआ है, न कि सुंदरता या सोशल मीडिया लोकप्रियता के कारण। प्रशासनिक अधिकारी समाज, कर्मचारियों और युवाओं के लिए रोल मॉडल होते हैं। इसलिए उन्हें अपनी गरिमा और पद की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।

    यदि कैमरे में आने की महत्वाकांक्षा अत्यधिक बढ़ जाए, तो व्यक्ति अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक सकता है। यह न तो अधिकारी के लिए हितकारी है और न ही सरकार एवं समाज के लिए। सरकार भी सामान्यतः उन्हीं अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपती है, जिनकी छवि गंभीर, कार्यकुशल और संतुलित होती है।

    अतः प्रशासनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत रील संस्कृति से बचते हुए अपने कर्तव्यों, जनसेवा और प्रशासनिक दक्षता पर अधिक ध्यान देना चाहिए। यही उनकी वास्तविक पहचान और सम्मान का आधार होना चाहिए।

    — रमेशचन्द्र चन्द्रे

  • शहर: मशीनरी व्यापारी संघ के निर्वाचन निर्विरोध संपन्न, दिनेश मंडवारिया अध्यक्ष निर्वाचित

    शहर:
    शहर   - नीमच[30-08-2026]
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  • शहर: मशीनरी व्यापारी संघ के निर्वाचन निर्विरोध संपन्न, दिनेश मंडवारिया अध्यक्ष निर्वाचित

    मशीनरी व्यापारी संघ के निर्वाचन निर्विरोध संपन्न, दिनेश मंडवारिया अध्यक्ष निर्वाचित
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  • शहर: एमआर-10 फ्लाईओवर लगभग तैयार, अब मार्किंग-लाइटिंग की बारी; सितंबर में सर्विस रोड की मरम्मत

    शहर:
    शहर   - इंदौर[29-08-2026]
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  • शहर: एमआर-10 फ्लाईओवर लगभग तैयार, अब मार्किंग-लाइटिंग की बारी; सितंबर में सर्विस रोड की मरम्मत

    एमआर-10 फ्लाईओवर लगभग तैयार, अब मार्किंग-लाइटिंग की बारी; सितंबर में सर्विस रोड की मरम्मत
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  • नीमच में ‘खेलो इंडिया संवाद’: प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से कहा—एक खेल अपनाएं, अपना सर्वश्रेष्ठ दें

    नीमच में ‘खेलो इंडिया संवाद’:
    शहर   - नीमच[27-08-2026]
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  • नीमच में ‘खेलो इंडिया संवाद’: प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से कहा—एक खेल अपनाएं, अपना सर्वश्रेष्ठ दें

     प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से कहा—एक खेल अपनाएं, अपना सर्वश्रेष्ठ दें
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  • शहर: जय श्री गणेश बस ने यात्रियों को नीमच की जगह निम्बाहेड़ा उतारा, फिर 40 मिनट खड़े होकर सफर

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  • शहर: जय श्री गणेश बस ने यात्रियों को नीमच की जगह निम्बाहेड़ा उतारा, फिर 40 मिनट खड़े होकर सफर

    जय श्री गणेश बस ने यात्रियों को नीमच की जगह निम्बाहेड़ा उतारा, फिर 40 मिनट खड़े होकर सफर
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  • शहर: इंदौर कलेक्टर कार्यालय में ABVP कार्यकर्ताओं का हंगामा, बैरिकेड तोड़कर परिसर में घुसे

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    शहर   - नीमच[27-08-2026]
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  • शहर: इंदौर कलेक्टर कार्यालय में ABVP कार्यकर्ताओं का हंगामा, बैरिकेड तोड़कर परिसर में घुसे

    इंदौर कलेक्टर कार्यालय में ABVP कार्यकर्ताओं का हंगामा, बैरिकेड तोड़कर परिसर में घुसे
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  • शहर: सावन की हरियाली में सजा उत्सव, महिलाओं ने जमकर बिखेरा रंग और उमंग

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    शहर   - नीमच[23-08-2026]
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  • शहर: बचपन को खुला आसमान चाहिए, खेल के लिए खुले मैदान

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  • शहर: बचपन को खुला आसमान चाहिए, खेल के लिए खुले मैदान

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  • शहर: ज्ञानोदय इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में नई शुरुआत, नए सपनों के साथ ‘Pharma Futurum’ का आगाज

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  • शहर: बालकवि बैरागी टीचर एजुकेशन रिसर्च सेंटर में इंडक्शन प्रोग्राम, नवागत विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत

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  • शहर: बालकवि बैरागी टीचर एजुकेशन रिसर्च सेंटर में इंडक्शन प्रोग्राम, नवागत विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत

    बालकवि बैरागी टीचर एजुकेशन रिसर्च सेंटर में इंडक्शन प्रोग्राम, नवागत विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत
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  • शहर: नीमच को एयर एम्बुलेंस योजना का लाभ क्यों नहीं मिला? कौन जिम्मेदार—पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने उठाए सवाल

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    शहर   - नीमच[10-08-2026]
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  • शहर: नीमच को एयर एम्बुलेंस योजना का लाभ क्यों नहीं मिला? कौन जिम्मेदार—पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने उठाए सवाल

    नीमच को एयर एम्बुलेंस योजना का लाभ क्यों नहीं मिला? कौन जिम्मेदार—पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने उठाए सवाल
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  • शहर: सेवा प्रकल्प से इनरव्हील ने जीता बच्चों का दिल, पौधों के साथ बांटी खुशियां

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  • शहर: सेवा प्रकल्प से इनरव्हील ने जीता बच्चों का दिल, पौधों के साथ बांटी खुशियां

    सेवा प्रकल्प से इनरव्हील ने जीता बच्चों का दिल, पौधों के साथ बांटी खुशियां
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  • 58 किलो डोडाचूरा के साथ दो तस्कर गिरफ्तार: बिना नंबर की बाइक ने खोला राज, पुलिस ने रास्ते में ही दबोचा

    58 किलो डोडाचूरा के साथ दो तस्कर गिरफ्तार:
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  • 58 किलो डोडाचूरा के साथ दो तस्कर गिरफ्तार: बिना नंबर की बाइक ने खोला राज, पुलिस ने रास्ते में ही दबोचा

     बिना नंबर की बाइक ने खोला राज, पुलिस ने रास्ते में ही दबोचा
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  • ईमानदारी अभी जिंदा है: चीताखेड़ा के नवनीत सेन परमार ने लौटाई ₹4300 की थैली, मंदिर परिसर में सौंपी रकमईमानदारी अभी जिंदा है: चीताखेड़ा के नवनीत सेन परमार ने लौटाई ₹4300 की थैली, मंदिर परिसर में सौंपी रकम

    ईमानदारी अभी जिंदा है:
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  • शहर: विद्यार्थी परिषद से युवा मोर्चा तक सक्रिय रहे अभिषेक कोठारी, अब निभाएंगे सांसद प्रतिनिधि की जिम्मेदारी

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  • शहर: विद्यार्थी परिषद से युवा मोर्चा तक सक्रिय रहे अभिषेक कोठारी, अब निभाएंगे सांसद प्रतिनिधि की जिम्मेदारी

    विद्यार्थी परिषद से युवा मोर्चा तक सक्रिय रहे अभिषेक कोठारी, अब निभाएंगे सांसद प्रतिनिधि की जिम्मेदारी
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  • शहर: खेल का मैदान बचाने सड़क पर उतरे खिलाड़ी, कहा—अगर मैदान छिनेंगे तो सड़कें ही बनेंगी पिच

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