• होम
  • वीडियो
  • सर्च
  • Contact
× Avatar
Forgot password?
  • देशदेश
  • विदेशविदेश
  • राज्यराज्य
  • शहरशहर
  • मंडी भावमंडी भाव
  • व्यापारव्यापार
  • धर्मधर्म
  • खेलखेल
  • सुप्रभातसुप्रभात
  • चुनावचुनाव
  • मनोरंजनमनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी समाचारटेक्नोलॉजी समाचार
  • संपादकीयसंपादकीय
  • कृषिकृषि
  • स्वास्थस्वास्थ
  • रोजगाररोजगार
  • देशदेश
  • विदेशविदेश
  • राज्यराज्य
  • शहरशहर
  • मंडी भावमंडी भाव
  • व्यापारव्यापार
  • धर्मधर्म
  • खेलखेल
  • सुप्रभातसुप्रभात
  • चुनावचुनाव
  • मनोरंजनमनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी समाचारटेक्नोलॉजी समाचार
  • संपादकीयसंपादकीय
  • कृषिकृषि
  • स्वास्थस्वास्थ
  • रोजगाररोजगार
  • होम
  • वीडियो
  • सर्च
  • Contact
  • निर्जला एकादशी व्रत कथा : एक व्रत, सभी एकादशियों का पुण्य फल

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    निर्जला एकादशी व्रत कथा
    धर्म   - नीमच[25-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • मालवांचल मित्र, धर्म: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। वर्ष भर में आने वाली सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भक्त अन्न ही नहीं, बल्कि जल का भी त्याग करके भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे वर्ष भर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।

    निर्जला एकादशी व्रत कथा

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में सबसे बलशाली भीमसेन अत्यधिक भोजन करने वाले थे। माता कुंती, युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल और सहदेव सभी एकादशी का व्रत रखते थे, लेकिन भीमसेन के लिए भूखे रहना अत्यंत कठिन था।

    एक दिन भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास से कहा, “हे गुरुदेव! मैं भगवान विष्णु का भक्त हूँ, परंतु भूख सहन नहीं कर पाता। कृपया ऐसा उपाय बताइए जिससे मुझे सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो सके।”

    तब महर्षि वेदव्यास ने कहा, “यदि तुम सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर सकते, तो ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला व्रत रखो। इस दिन अन्न और जल दोनों का त्याग करना होगा। इस एक व्रत के प्रभाव से तुम्हें वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होगा।”

    भीमसेन ने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए निर्जला एकादशी का कठोर व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उन्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त हुआ और अंततः मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसी कारण इस एकादशी को “भीमसेनी एकादशी” भी कहा जाता है।

    निर्जला एकादशी का महत्व

    निर्जला एकादशी को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। इस दिन उपवास, जप, ध्यान और दान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि इस व्रत का पालन करने वाला भक्त विष्णुलोक को प्राप्त करता है।

    • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
    • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें।
    • निर्जला व्रत का संकल्प लें।
    • पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करें।
    • विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
    • रात्रि में भजन-कीर्तन और भगवान का स्मरण करें।
    • द्वादशी तिथि में पूजा के पश्चात व्रत का पारण करें।
    • जल, अन्न, फल, वस्त्र एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें।

    निर्जला एकादशी से मिलने वाले लाभ

    • सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।
    • भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
    • पापों का क्षय और पुण्य में वृद्धि होती है।
    • मन को शांति और आत्मिक बल मिलता है।
    • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

    भक्ति, संयम और श्रद्धा का पर्व

    निर्जला एकादशी केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और भक्ति का पर्व है। यह हमें अनुशासन, त्याग और ईश्वर के प्रति समर्पण की शिक्षा देता है। जो भक्त सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है। इसलिए निर्जला एकादशी का व्रत भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।



  • निर्जला एकादशी व्रत कथा : एक व्रत, सभी एकादशियों का पुण्य फल

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    निर्जला एकादशी व्रत कथा
    धर्म   - नीमच[25-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp

    मालवांचल मित्र, धर्म: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। वर्ष भर में आने वाली सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भक्त अन्न ही नहीं, बल्कि जल का भी त्याग करके भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे वर्ष भर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।

    निर्जला एकादशी व्रत कथा

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में सबसे बलशाली भीमसेन अत्यधिक भोजन करने वाले थे। माता कुंती, युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल और सहदेव सभी एकादशी का व्रत रखते थे, लेकिन भीमसेन के लिए भूखे रहना अत्यंत कठिन था।

    एक दिन भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास से कहा, “हे गुरुदेव! मैं भगवान विष्णु का भक्त हूँ, परंतु भूख सहन नहीं कर पाता। कृपया ऐसा उपाय बताइए जिससे मुझे सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो सके।”

    तब महर्षि वेदव्यास ने कहा, “यदि तुम सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर सकते, तो ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला व्रत रखो। इस दिन अन्न और जल दोनों का त्याग करना होगा। इस एक व्रत के प्रभाव से तुम्हें वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होगा।”

    भीमसेन ने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए निर्जला एकादशी का कठोर व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उन्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त हुआ और अंततः मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसी कारण इस एकादशी को “भीमसेनी एकादशी” भी कहा जाता है।

    निर्जला एकादशी का महत्व

    निर्जला एकादशी को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। इस दिन उपवास, जप, ध्यान और दान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि इस व्रत का पालन करने वाला भक्त विष्णुलोक को प्राप्त करता है।

    • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
    • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें।
    • निर्जला व्रत का संकल्प लें।
    • पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करें।
    • विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
    • रात्रि में भजन-कीर्तन और भगवान का स्मरण करें।
    • द्वादशी तिथि में पूजा के पश्चात व्रत का पारण करें।
    • जल, अन्न, फल, वस्त्र एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें।

    निर्जला एकादशी से मिलने वाले लाभ

    • सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।
    • भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
    • पापों का क्षय और पुण्य में वृद्धि होती है।
    • मन को शांति और आत्मिक बल मिलता है।
    • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

    भक्ति, संयम और श्रद्धा का पर्व

    निर्जला एकादशी केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और भक्ति का पर्व है। यह हमें अनुशासन, त्याग और ईश्वर के प्रति समर्पण की शिक्षा देता है। जो भक्त सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है। इसलिए निर्जला एकादशी का व्रत भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

  • धर्म: चांदी की बोलेरो पहुंची सांवलिया सेठ के दरबार, 600 ग्राम की अनोखी भेंट बनी आकर्षण का केंद्र

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[05-08-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • धर्म: चांदी की बोलेरो पहुंची सांवलिया सेठ के दरबार, 600 ग्राम की अनोखी भेंट बनी आकर्षण का केंद्र

    चांदी की बोलेरो पहुंची सांवलिया सेठ के दरबार, 600 ग्राम की अनोखी भेंट बनी आकर्षण का केंद्र
    धर्म   - नीमच[05-08-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • निर्जला एकादशी व्रत कथा: एक व्रत, सभी एकादशियों का पुण्य फल

    निर्जला एकादशी व्रत कथा:
    धर्म   - नीमच[25-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • निर्जला एकादशी व्रत कथा: एक व्रत, सभी एकादशियों का पुण्य फल

     एक व्रत, सभी एकादशियों का पुण्य फल
    धर्म   - नीमच[25-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में अनोखी पहल: रक्तदान करने वाले श्रद्धालुओं को मिल रही वीआईपी एंट्री

    ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में अनोखी पहल:
    धर्म   - नीमच[20-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में अनोखी पहल: रक्तदान करने वाले श्रद्धालुओं को मिल रही वीआईपी एंट्री

     रक्तदान करने वाले श्रद्धालुओं को मिल रही वीआईपी एंट्री
    धर्म   - नीमच[20-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • 22 जून का सूर्य गोचर: आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य से इन राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ

    22 जून का सूर्य गोचर:
    धर्म   - नीमच[18-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • 22 जून का सूर्य गोचर: आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य से इन राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ

     आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य से इन राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ
    धर्म   - नीमच[18-06-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • जैन दर्शन : आत्म शुद्धि, अहिंसा और मोक्ष का मार्ग — भावना कांठेड़

    जैन दर्शन :
    धर्म   - नीमच[16-05-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • जैन दर्शन : आत्म शुद्धि, अहिंसा और मोक्ष का मार्ग — भावना कांठेड़

     आत्म शुद्धि, अहिंसा और मोक्ष का मार्ग — भावना कांठेड़
    धर्म   - नीमच[16-05-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • बुद्ध पूर्णिमा: शांति की रोशनी, जो भीतर से जगती है

    बुद्ध पूर्णिमा:
    धर्म   - नीमच[01-05-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • बुद्ध पूर्णिमा: शांति की रोशनी, जो भीतर से जगती है

     शांति की रोशनी, जो भीतर से जगती है
    धर्म   - नीमच[01-05-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आस्था और परंपरा का पर्व: महिलाओं ने श्रद्धा से किया दशा माता व्रत, सुनी प्रेरणादायक कथा

    आस्था और परंपरा का पर्व:
    धर्म   - नीमच[13-03-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आस्था और परंपरा का पर्व: महिलाओं ने श्रद्धा से किया दशा माता व्रत, सुनी प्रेरणादायक कथा

     महिलाओं ने श्रद्धा से किया दशा माता व्रत, सुनी प्रेरणादायक कथा
    धर्म   - नीमच[13-03-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आज के दर्शन: नीमच बस स्टैंड के राजा — श्री स्वयं सिद्ध विनायक गणेश मंदिर

    आज के दर्शन:
    धर्म   - नीमच[25-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आज के दर्शन: नीमच बस स्टैंड के राजा — श्री स्वयं सिद्ध विनायक गणेश मंदिर

     नीमच बस स्टैंड के राजा — श्री स्वयं सिद्ध विनायक गणेश मंदिर
    धर्म   - नीमच[25-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आज के दर्शन - शांतादुर्गा देवी: शांति और शक्ति का अद्भुत संगम

    आज के दर्शन - शांतादुर्गा देवी:
    धर्म   - नीमच[21-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आज के दर्शन - शांतादुर्गा देवी: शांति और शक्ति का अद्भुत संगम

     शांति और शक्ति का अद्भुत संगम
    धर्म   - नीमच[21-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आज के दर्शन: चिंतामण गणेश मंदिर, उज्जैन में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था

    आज के दर्शन:
    धर्म   - उज्जैन[18-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आज के दर्शन: चिंतामण गणेश मंदिर, उज्जैन में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था

     चिंतामण गणेश मंदिर, उज्जैन में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था
    धर्म   - उज्जैन[18-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • धर्म: आज के दर्शन – श्री होरी हनुमान धाम, नांदवेल (मंदसौर)

    धर्म:
    धर्म   - मंदसौर[17-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • धर्म: आज के दर्शन – श्री होरी हनुमान धाम, नांदवेल (मंदसौर)

    आज के दर्शन – श्री होरी हनुमान धाम, नांदवेल (मंदसौर)
    धर्म   - मंदसौर[17-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • धर्म: भगवान वेंकटेश (बालाजी) – आस्था, विश्वास और चमत्कार की दिव्य कथा

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[16-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • धर्म: भगवान वेंकटेश (बालाजी) – आस्था, विश्वास और चमत्कार की दिव्य कथा

    भगवान वेंकटेश (बालाजी) – आस्था, विश्वास और चमत्कार की दिव्य कथा
    धर्म   - नीमच[16-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • धर्म: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में आज के दर्शन और महाशिवरात्रि का महत्व

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[15-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • धर्म: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में आज के दर्शन और महाशिवरात्रि का महत्व

    महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में आज के दर्शन और महाशिवरात्रि का महत्व
    धर्म   - नीमच[15-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आज के दर्शन: जगतपिता ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर की दिव्य महिमा

    आज के दर्शन:
    धर्म   - नीमच[14-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आज के दर्शन: जगतपिता ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर की दिव्य महिमा

     जगतपिता ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर की दिव्य महिमा
    धर्म   - नीमच[14-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आज के दर्शन: श्री जगन्नाथ भगवान — भक्तों के नाथ, विश्व के पालनहार

    आज के दर्शन:
    धर्म   - दिल्ली[12-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • आज के दर्शन: श्री जगन्नाथ भगवान — भक्तों के नाथ, विश्व के पालनहार

     श्री जगन्नाथ भगवान — भक्तों के नाथ, विश्व के पालनहार
    धर्म   - दिल्ली[12-02-2026]
    • Facebook
    • Twitter
    • WhatsApp
    Facebook Twitter WhatsApp
  • LoginLogin