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नीमच। मालवांचल मित्र गुरु पूर्णिमा और महर्षि श्रृंग ऋषि जयंती का अवसर था। श्री भूतेश्वर मंदिर परिसर में सिखवाल ब्राह्मण समाज के लोग एकत्र हुए। माहौल श्रद्धा का था, लेकिन कार्यक्रम केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहा। समाज ने अपनी नई कार्यकारिणी का गठन किया, मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया और यह संदेश भी दिया कि परंपरा के साथ नई पीढ़ी को आगे बढ़ाना ही समाज की असली ताकत है। कार्यक्रम की शुरुआत महर्षि श्रृंग ऋषि के पूजन-अर्चन से हुई। इसके बाद संरक्षक शिवकुमार शर्मा, रामेश्वर शर्मा, उपाध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा और बालकृष्ण पांडे मंचासीन हुए। सभी अतिथियों का पुष्पहार और उपरणा पहनाकर स्वागत किया गया। समिति के पंजीकरण के तीन वर्ष पूरे होने पर नए सिरे से कार्यकारिणी का गठन किया गया। सर्वसम्मति से राजेन्द्र पांडे को अध्यक्ष चुना गया। अरुण जोशी को सचिव, राजमल व्यास को कोषाध्यक्ष, किशन पुरोहित को युवा प्रकोष्ठ प्रभारी और प्रियंका कविश्वर को महिला प्रकोष्ठ संयोजिका की जिम्मेदारी सौंपी गई।
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक पल तब आया जब पिछले शैक्षणिक सत्र में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए 20 विद्यार्थियों सहित शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले समाज के प्रतिभावानों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल पुरस्कार नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का संदेश भी था। समाज के अध्यक्ष राजेन्द्र पांडे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में समाज को संगठित रहने और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन राजमल व्यास ने किया, जबकि अंत में अरुण जोशी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. गिरिराज शर्मा, कांतिलाल पुरोहित, सत्यनारायण शर्मा, राधेश्याम माण्मिया, बालकृष्ण पांडे, महासचिव गोविंद शर्मा, स्मृति शर्मा, सह सचिव परीक्षित उपाध्याय, शशि व्यास, उमाशंकर व्यास, संजय उपाध्याय, सुधीर कविश्वर, अमित श्रृंगी, दिनेश शर्मा, संजय पांडे, अनिल पांडे, राजेन्द्र पांडे (तिरुपति नगर) सहित बड़ी संख्या में समाजजन और महिला मंडल की सदस्याएं—मेघना जोशी, ज्ञानू व्यास, रेखा पांडे, बिंदिया पांडे, रितु पांडे, आरोही उपाध्याय, अनीता पांडे, स्मृति शर्मा, कृष्णा शर्मा और मंजू शर्मा उपस्थित रहीं।
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नीमच। मालवांचल मित्र
गुरु पूर्णिमा और महर्षि श्रृंग ऋषि जयंती का अवसर था। श्री भूतेश्वर मंदिर परिसर में सिखवाल ब्राह्मण समाज के लोग एकत्र हुए। माहौल श्रद्धा का था, लेकिन कार्यक्रम केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहा। समाज ने अपनी नई कार्यकारिणी का गठन किया, मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया और यह संदेश भी दिया कि परंपरा के साथ नई पीढ़ी को आगे बढ़ाना ही समाज की असली ताकत है।
कार्यक्रम की शुरुआत महर्षि श्रृंग ऋषि के पूजन-अर्चन से हुई। इसके बाद संरक्षक शिवकुमार शर्मा, रामेश्वर शर्मा, उपाध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा और बालकृष्ण पांडे मंचासीन हुए। सभी अतिथियों का पुष्पहार और उपरणा पहनाकर स्वागत किया गया।
समिति के पंजीकरण के तीन वर्ष पूरे होने पर नए सिरे से कार्यकारिणी का गठन किया गया। सर्वसम्मति से राजेन्द्र पांडे को अध्यक्ष चुना गया। अरुण जोशी को सचिव, राजमल व्यास को कोषाध्यक्ष, किशन पुरोहित को युवा प्रकोष्ठ प्रभारी और प्रियंका कविश्वर को महिला प्रकोष्ठ संयोजिका की जिम्मेदारी सौंपी गई।

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक पल तब आया जब पिछले शैक्षणिक सत्र में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए 20 विद्यार्थियों सहित शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले समाज के प्रतिभावानों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल पुरस्कार नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का संदेश भी था।
समाज के अध्यक्ष राजेन्द्र पांडे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में समाज को संगठित रहने और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन राजमल व्यास ने किया, जबकि अंत में अरुण जोशी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. गिरिराज शर्मा, कांतिलाल पुरोहित, सत्यनारायण शर्मा, राधेश्याम माण्मिया, बालकृष्ण पांडे, महासचिव गोविंद शर्मा, स्मृति शर्मा, सह सचिव परीक्षित उपाध्याय, शशि व्यास, उमाशंकर व्यास, संजय उपाध्याय, सुधीर कविश्वर, अमित श्रृंगी, दिनेश शर्मा, संजय पांडे, अनिल पांडे, राजेन्द्र पांडे (तिरुपति नगर) सहित बड़ी संख्या में समाजजन और महिला मंडल की सदस्याएं—मेघना जोशी, ज्ञानू व्यास, रेखा पांडे, बिंदिया पांडे, रितु पांडे, आरोही उपाध्याय, अनीता पांडे, स्मृति शर्मा, कृष्णा शर्मा और मंजू शर्मा उपस्थित रहीं।
आज के दौर में अक्सर समाजों की बैठकों की चर्चा केवल चुनाव तक सिमट जाती है, लेकिन यहां चुनाव के साथ शिक्षा, प्रतिभा सम्मान और सामाजिक सहभागिता तीनों को बराबर महत्व मिला। यही किसी भी समाज की असली पूंजी होती है—जहां नई जिम्मेदारियां भी बांटी जाएं और नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का मंच भी मिले।