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नई दिल्ली, 20 मार्च: भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। शुरुआती कारोबार में रुपया 19 पैसे टूटकर 93.15 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जबकि 18 मार्च को यह 92.63 रुपये के रिकॉर्ड लो पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि वेस्ट एशिया में जारी जंग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय करेंसी पर पड़ा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद डॉलर की मांग बढ़ गई, जिससे रुपया दबाव में आ गया। क्यों कमजोर हुआ रुपया?
शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर रुपये की कमजोरी और तेल की बढ़ती कीमतों ने शेयर बाजार को संवेदनशील बना दिया है। निवेशकों की नजर इन तीन मुख्य बातों पर टिकी हुई है:
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में यही तीन कारक तय करेंगे कि भारतीय शेयर बाजार ऊपर जाएगा या नीचे। नागरिकों के लिए चेतावनी महंगाई बढ़ने और रुपया कमजोर होने से आम जनता पर सीधा असर पड़ेगा। खासकर तेल और गैस जैसे जरूरी उत्पाद महंगे होंगे। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि लोग बड़े खर्चों से बचें और अपनी बचत सुरक्षित रखें। |
नई दिल्ली, 20 मार्च: भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। शुरुआती कारोबार में रुपया 19 पैसे टूटकर 93.15 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जबकि 18 मार्च को यह 92.63 रुपये के रिकॉर्ड लो पर बंद हुआ था।
विशेषज्ञों का कहना है कि वेस्ट एशिया में जारी जंग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय करेंसी पर पड़ा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद डॉलर की मांग बढ़ गई, जिससे रुपया दबाव में आ गया।
क्यों कमजोर हुआ रुपया?
तेल की कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करता है। महंगे तेल से देश का इम्पोर्ट बिल बढ़ता है, डॉलर की डिमांड बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है।
‘रिस्क-ऑफ’ माहौल: वैश्विक निवेशक अस्थिरता के कारण अमेरिकी डॉलर में निवेश कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप डॉलर मजबूत हुआ और रुपया कमजोर हुआ।
विदेशी फंड का पलायन: विदेशी निवेशक और फंड भारतीय कंपनियों के शेयर बेचकर पैसा बाहर निकाल रहे हैं। ये रुपए को डॉलर में बदलने से करेंसी की गिरावट और तेज हो रही है।
शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर
रुपये की कमजोरी और तेल की बढ़ती कीमतों ने शेयर बाजार को संवेदनशील बना दिया है। निवेशकों की नजर इन तीन मुख्य बातों पर टिकी हुई है:
वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ने से बाजार में गिरावट का डर
युद्ध या तनाव के कारण कच्चे तेल की महंगाई
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रुपये की गिरावट रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में यही तीन कारक तय करेंगे कि भारतीय शेयर बाजार ऊपर जाएगा या नीचे।
नागरिकों के लिए चेतावनी
महंगाई बढ़ने और रुपया कमजोर होने से आम जनता पर सीधा असर पड़ेगा। खासकर तेल और गैस जैसे जरूरी उत्पाद महंगे होंगे। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि लोग बड़े खर्चों से बचें और अपनी बचत सुरक्षित रखें।