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मालवांचल मित्र, विदेश विशेष: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के ताज़ा बयान ने यह संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द ही इस संघर्ष से खुद को अलग कर सकता है—चाहे कोई औपचारिक समझौता हो या नहीं। मंगलवार (1 अप्रैल) को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को इतना नुकसान पहुंचाया है कि उसकी भरपाई करने में उसे वर्षों लगेंगे। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सत्ता में अब अपेक्षाकृत “कम कट्टरपंथी” लोग हैं और हालात तेजी से बदल रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका का लक्ष्य सिर्फ इतना सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता से दूर हो जाए। इसके बाद अमेरिका दो से तीन हफ्तों के भीतर इस युद्ध से बाहर निकल सकता है। ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर ईरान बातचीत के लिए तैयार होता है तो रास्ता खुला है, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो भी अमेरिका अपनी रणनीति के तहत आगे बढ़ेगा। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि ईरान समझौते के लिए उत्सुक है, इसलिए जल्द ही कोई डील संभव हो सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ कूटनीतिक स्तर पर समाधान निकालने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। हालांकि, ईरान ने अब तक औपचारिक वार्ता शुरू होने से इनकार किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें अमेरिकी पक्ष से सीधे और परोक्ष—दोनों तरह के संदेश मिल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन संदेशों को औपचारिक बातचीत नहीं माना जा सकता। अराघची के मुताबिक, अमेरिका की ओर से 15 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन ईरान ने अब तक उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही अपनी शर्तें रखी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ संदेश चेतावनी भरे थे, जबकि कुछ में अमेरिका की मांगें शामिल थीं। ईरान का रुख फिलहाल सख्त बना हुआ है—तेहरान का कहना है कि वह केवल युद्धविराम के लिए संघर्ष नहीं रोकेगा, बल्कि तब तक जारी रखेगा जब तक सभी मुद्दों का स्थायी समाधान नहीं निकल जाता। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सुरक्षा एजेंसियों के स्तर पर बैक-चैनल बातचीत भी जारी है, लेकिन खुली और औपचारिक वार्ता कब शुरू होगी, इस पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है। ट्रंप के हालिया बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले हफ्तों में यह तनाव कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता है या फिर टकराव और गहराता है। |
मालवांचल मित्र, विदेश विशेष: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के ताज़ा बयान ने यह संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द ही इस संघर्ष से खुद को अलग कर सकता है—चाहे कोई औपचारिक समझौता हो या नहीं।
मंगलवार (1 अप्रैल) को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को इतना नुकसान पहुंचाया है कि उसकी भरपाई करने में उसे वर्षों लगेंगे। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सत्ता में अब अपेक्षाकृत “कम कट्टरपंथी” लोग हैं और हालात तेजी से बदल रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका का लक्ष्य सिर्फ इतना सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता से दूर हो जाए। इसके बाद अमेरिका दो से तीन हफ्तों के भीतर इस युद्ध से बाहर निकल सकता है।
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर ईरान बातचीत के लिए तैयार होता है तो रास्ता खुला है, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो भी अमेरिका अपनी रणनीति के तहत आगे बढ़ेगा। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि ईरान समझौते के लिए उत्सुक है, इसलिए जल्द ही कोई डील संभव हो सकती है।
दूसरी ओर, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ कूटनीतिक स्तर पर समाधान निकालने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। हालांकि, ईरान ने अब तक औपचारिक वार्ता शुरू होने से इनकार किया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें अमेरिकी पक्ष से सीधे और परोक्ष—दोनों तरह के संदेश मिल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन संदेशों को औपचारिक बातचीत नहीं माना जा सकता। अराघची के मुताबिक, अमेरिका की ओर से 15 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन ईरान ने अब तक उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही अपनी शर्तें रखी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ संदेश चेतावनी भरे थे, जबकि कुछ में अमेरिका की मांगें शामिल थीं। ईरान का रुख फिलहाल सख्त बना हुआ है—तेहरान का कहना है कि वह केवल युद्धविराम के लिए संघर्ष नहीं रोकेगा, बल्कि तब तक जारी रखेगा जब तक सभी मुद्दों का स्थायी समाधान नहीं निकल जाता।
सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सुरक्षा एजेंसियों के स्तर पर बैक-चैनल बातचीत भी जारी है, लेकिन खुली और औपचारिक वार्ता कब शुरू होगी, इस पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है।
ट्रंप के हालिया बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले हफ्तों में यह तनाव कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता है या फिर टकराव और गहराता है।