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यूँ तो मंदसौर से अलग हुए 27 वर्ष कब बीत गए, इसका अहसास भी नहीं हुआ… वह दौर भी था, जब नीमच अंचल मंदसौर जिले का हिस्सा हुआ करता था… संघर्ष किया… संगठन को सींचा… और उसे उस ऊंचाई तक पहुंचाया कि पूरे देश में यह उदाहरण दिया जाने लगा — कार्यालय का सफर — संघर्ष से स्वाभिमान तक किसी भी राजनीतिक दल के लिए उसका स्वयं का कार्यालय केवल एक भवन नहीं होता… नीमच भाजपा का यह सफर भी कम रोचक नहीं रहा— हर पड़ाव ने संगठन की जड़ों को और मजबूत किया। अब सपना होगा साकार और अब… तो यह सिर्फ एक शिलान्यास नहीं होगा… भावनाओं का संगम — गर्व और आत्ममंथन जब हम अन्य जिलों में उनके भव्य कार्यालय देखते थे, आज वह प्रश्न समाप्त हो रहा है… संदेश — एकता ही संगठन की शक्ति इस ऐतिहासिक अवसर पर… अपने योगदान का बखान करने के बजाय क्योंकि… आइए… एक चित्त, एक मन, एक भाव होकर — राजू नागदा मोडी |
यूँ तो मंदसौर से अलग हुए 27 वर्ष कब बीत गए, इसका अहसास भी नहीं हुआ…
लेकिन जब इन वर्षों की परतें खोलकर देखा जाता है, तो संघर्ष, समर्पण और संगठन की तपस्या की पूरी गाथा सामने आ जाती है।
वह दौर भी था, जब नीमच अंचल मंदसौर जिले का हिस्सा हुआ करता था…
लेकिन तब भी यहाँ के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने यहीं बैठकर अखंड मध्यप्रदेश को मजबूत नेतृत्व दिया।
संघर्ष किया… संगठन को सींचा… और उसे उस ऊंचाई तक पहुंचाया कि पूरे देश में यह उदाहरण दिया जाने लगा —
"अगर कहीं संगठन सबसे मजबूत है, तो वह मध्यप्रदेश है… और उसमें भी मंदसौर-नीमच का नाम गर्व से लिया जाता है।"
कार्यालय का सफर — संघर्ष से स्वाभिमान तक
किसी भी राजनीतिक दल के लिए उसका स्वयं का कार्यालय केवल एक भवन नहीं होता…
वह उसकी आत्मा, उसकी पहचान और उसके अस्तित्व का प्रतीक होता है।
नीमच भाजपा का यह सफर भी कम रोचक नहीं रहा—
सिटी सेंटर की जाजू बिल्डिंग से शुरुआत…
फिर मेंहनोत भवन…
फिर टी.आई.टी.…
और बाद में तपोभूमि तक का यह सफर…
हर पड़ाव ने संगठन की जड़ों को और मजबूत किया।
अब सपना होगा साकार
और अब…
27 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद
6 अप्रैल, प्रातः 11 बजे
जब अपने स्वयं के भवन के निर्माण कार्य का शुभारंभ होगा…
तो यह सिर्फ एक शिलान्यास नहीं होगा…
यह हर उस कार्यकर्ता के पसीने, संघर्ष और समर्पण का सम्मान होगा,
जिसने बिना किसी अपेक्षा के संगठन को सींचा।
भावनाओं का संगम — गर्व और आत्ममंथन
जब हम अन्य जिलों में उनके भव्य कार्यालय देखते थे,
तो मन में एक टीस उठती थी…
एक प्रश्न उठता था — “हमारा अपना घर कब होगा?”
आज वह प्रश्न समाप्त हो रहा है…
और उसकी जगह ले रहा है — गर्व, आनंद और आत्मसम्मान।
संदेश — एकता ही संगठन की शक्ति
इस ऐतिहासिक अवसर पर…
जरूरत है कि हम
छोटे-बड़े, पुराने-नए के भेद से ऊपर उठें…
अपने योगदान का बखान करने के बजाय
उन वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को नमन करें,
जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में संगठन की नींव रखी।
क्योंकि…
अगर हम आज खड़े हैं,
तो उनकी तपस्या की वजह से।
आइए…
इस 27 वर्षों की प्रतीक्षा के इस स्वर्णिम क्षण को
एक उत्सव बनाएं…
एक चित्त, एक मन, एक भाव होकर
केन्द्रीय, प्रदेश और जिला नेतृत्व के साथ
इस ऐतिहासिक शिलान्यास समारोह में
बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाएं।
— राजू नागदा मोडी