मालवांचल मित्र, नीमच: शहर के ग्वालटोली क्षेत्र में रविवार को आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री चंद्रवंशी ग्वाला समाज द्वारा आयोजित आठवें सामूहिक विवाह सम्मेलन एवं गंगा भोज कार्यक्रम के दूसरे दिन 26 जोड़ों का विवाह वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान निकली भव्य बिंदोली ने पूरे शहर का ध्यान आकर्षित किया।
सुबह मंदिर परिसर में सभी दूल्हा-दुल्हन एकत्रित हुए, जहां से बिंदोली की शुरुआत हुई। बिंदोली का सबसे खास आकर्षण रहा सजी-धजी बैलगाड़ी, जिसमें भगवान ठाकुरजी विराजमान थे। इसके साथ ही एक विशेष बग्गी में माता तुलसी को विराजित किया गया। धार्मिक आस्था और परंपरा का यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए बेहद भावुक और आकर्षक रहा।
बिंदोली में शामिल सभी 26 दूल्हे शाही अंदाज में घोड़ी पर सवार नजर आए, जबकि दुल्हनें सजी-धजी बग्गियों में बैठकर इस आयोजन का हिस्सा बनीं। जैसे ही यह बिंदोली ग्वालटोली के प्रमुख मार्गों से गुजरी, पूरा क्षेत्र भगवा रंग और भक्ति गीतों से गूंज उठा। डीजे पर बज रहे भजनों पर समाज की महिलाएं और बालिकाएं झूमती नजर आईं। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने और जगह-जगह पुष्पवर्षा कर बिंदोली का स्वागत किया।
बिंदोली का समापन राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में हुआ, जहां सबसे पहले भगवान ठाकुरजी और माता तुलसी का विवाह संपन्न कराया गया। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी 26 जोड़ों ने अग्नि के समक्ष सात फेरे लेकर वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। समाज के वरिष्ठ जनों की उपस्थिति में नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया गया और उन्हें गृहस्थी का आवश्यक सामान भेंट किया गया।
यह सामूहिक विवाह सम्मेलन न केवल सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए भी एक बड़ा सहारा बनकर सामने आता है। ग्वालटोली का यह आयोजन परंपरा और संस्कृति को सहेजते हुए समाज में एकता और सहयोग का संदेश देने में सफल रहा।