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मालवांचल मित्र, मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक बयान के बाद शिवसेना (UBT) में संभावित टूट की चर्चाएं और तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के कुछ सांसद जल्द ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का रुख कर सकते हैं। हाल ही में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने कथित "ऑपरेशन टाइगर" के संबंध में पूछे गए सवाल पर संकेतात्मक जवाब दिया। उनके बयान को राजनीतिक गलियारों में शिवसेना (UBT) के भीतर चल रही उठापटक से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के दो सांसदों ने शिंदे खेमे के साथ जाने की इच्छा जताई है। यदि यह बदलाव होता है, तो लोकसभा में शिवसेना (UBT) की संख्या पर असर पड़ सकता है। साथ ही कुछ अन्य सांसदों के भी पार्टी बदलने की अटकलें लगाई जा रही हैं। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने संभावित बगावत को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जनता ने उनके उम्मीदवारों को पार्टी की विचारधारा और चुनाव चिन्ह पर भरोसा करके चुना था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि कुछ नेता पार्टी छोड़ते हैं तो उम्मीदवार चयन में हुई चूक की जिम्मेदारी नेतृत्व को लेनी चाहिए।
उधर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। उनके बयान से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के भीतर असंतोष की स्थिति अभी समाप्त नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सांसदों का एक बड़ा समूह शिंदे गुट में शामिल होता है, तो इसका प्रभाव केवल शिवसेना तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि महाराष्ट्र की व्यापक राजनीतिक तस्वीर पर भी पड़ेगा। वर्ष 2022 में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद यह पहला मौका होगा जब उद्धव ठाकरे के गुट को संसदीय स्तर पर इतनी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल राजनीतिक दलों और समर्थकों की नजरें संभावित फैसलों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल अटकलें हैं या महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। |
मालवांचल मित्र, मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक बयान के बाद शिवसेना (UBT) में संभावित टूट की चर्चाएं और तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के कुछ सांसद जल्द ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का रुख कर सकते हैं।
हाल ही में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने कथित "ऑपरेशन टाइगर" के संबंध में पूछे गए सवाल पर संकेतात्मक जवाब दिया। उनके बयान को राजनीतिक गलियारों में शिवसेना (UBT) के भीतर चल रही उठापटक से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के दो सांसदों ने शिंदे खेमे के साथ जाने की इच्छा जताई है। यदि यह बदलाव होता है, तो लोकसभा में शिवसेना (UBT) की संख्या पर असर पड़ सकता है। साथ ही कुछ अन्य सांसदों के भी पार्टी बदलने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने संभावित बगावत को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जनता ने उनके उम्मीदवारों को पार्टी की विचारधारा और चुनाव चिन्ह पर भरोसा करके चुना था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि कुछ नेता पार्टी छोड़ते हैं तो उम्मीदवार चयन में हुई चूक की जिम्मेदारी नेतृत्व को लेनी चाहिए।

उधर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। उनके बयान से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के भीतर असंतोष की स्थिति अभी समाप्त नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सांसदों का एक बड़ा समूह शिंदे गुट में शामिल होता है, तो इसका प्रभाव केवल शिवसेना तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि महाराष्ट्र की व्यापक राजनीतिक तस्वीर पर भी पड़ेगा। वर्ष 2022 में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद यह पहला मौका होगा जब उद्धव ठाकरे के गुट को संसदीय स्तर पर इतनी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल राजनीतिक दलों और समर्थकों की नजरें संभावित फैसलों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल अटकलें हैं या महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।