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भोपाल। मालवांचल मित्र सोमवार को राजा भोज एयरपोर्ट पर दिल्ली जाने वाले यात्रियों की यात्रा उस वक्त अटक गई, जब एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान IX-1790 में तकनीकी खराबी सामने आ गई। दोपहर 12:45 बजे उड़ान भरने वाली फ्लाइट समय पर रवाना नहीं हो सकी। देखते ही देखते इंतजार का समय बढ़ता गया और यात्री एयरपोर्ट पर ही बैठे रह गए। हालात यह रहे कि मध्य प्रदेश शासन के एसीएस अनुपम राजन भी करीब तीन घंटे तक एयरपोर्ट लाउंज में उड़ान का इंतजार करते रहे। उनके साथ बड़ी संख्या में अन्य यात्री भी फ्लाइट के रवाना होने की उम्मीद लगाए बैठे रहे। यानी मामला ऐसा था कि पद चाहे कितना भी बड़ा हो, तकनीकी खराबी के सामने एयरपोर्ट का लाउंज ही अगला ठिकाना बन गया। विमान में तकनीकी खराबी, इंजीनियरों ने संभाला मोर्चा फ्लाइट में तकनीकी समस्या सामने आने के बाद एयर इंडिया एक्सप्रेस की इंजीनियरिंग टीम सक्रिय हुई। विमान की तकनीकी जांच शुरू की गई और जरूरी मरम्मत का काम किया गया। विमान की खामी दूर होने और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही उसे उड़ान की अनुमति दी जानी थी। यात्रियों के लिए परेशानी सिर्फ इंतजार तक सीमित नहीं थी। लंबे समय तक उड़ान नहीं भरने के कारण कई यात्रियों को अपनी आगे की यात्रा और कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने की चिंता सताने लगी।
यात्रियों में नाराजगी, जानकारी को लेकर सवाल लगातार बढ़ती देरी से यात्रियों में नाराजगी भी दिखाई दी। यात्रियों का कहना था कि तकनीकी खराबी जैसी स्थिति में एयरलाइन की ओर से उन्हें समय-समय पर स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी आगे की यात्रा की योजना बना सकें। एयरपोर्ट पर आम यात्रियों के साथ वीआईपी यात्री भी उसी इंतजार में नजर आए। इससे साफ रहा कि विमान में तकनीकी दिक्कत आने के बाद इंतजार की कतार में किसी के पद या पहचान का असर नहीं चलता।
तीन घंटे का इंतजार, अब नजर उड़ान पर फिलहाल यात्रियों की नजर विमान के दोबारा उड़ान भरने पर टिकी रही। तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत पूरी होने के बाद ही विमान को दिल्ली के लिए रवाना किया जाना था। साफ बात यह है कि विमान की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता, लेकिन यात्रियों को घंटों इंतजार कराने के साथ-साथ उन्हें सही और समय पर जानकारी देना भी एयरलाइन की जिम्मेदारी है। तकनीकी खराबी कभी भी सामने आ सकती है, मगर ऐसी स्थिति में यात्री अंधेरे में न रहें—यही व्यवस्था की असली परीक्षा है। |
भोपाल। मालवांचल मित्र
सोमवार को राजा भोज एयरपोर्ट पर दिल्ली जाने वाले यात्रियों की यात्रा उस वक्त अटक गई, जब एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान IX-1790 में तकनीकी खराबी सामने आ गई। दोपहर 12:45 बजे उड़ान भरने वाली फ्लाइट समय पर रवाना नहीं हो सकी। देखते ही देखते इंतजार का समय बढ़ता गया और यात्री एयरपोर्ट पर ही बैठे रह गए।
हालात यह रहे कि मध्य प्रदेश शासन के एसीएस अनुपम राजन भी करीब तीन घंटे तक एयरपोर्ट लाउंज में उड़ान का इंतजार करते रहे। उनके साथ बड़ी संख्या में अन्य यात्री भी फ्लाइट के रवाना होने की उम्मीद लगाए बैठे रहे। यानी मामला ऐसा था कि पद चाहे कितना भी बड़ा हो, तकनीकी खराबी के सामने एयरपोर्ट का लाउंज ही अगला ठिकाना बन गया।
विमान में तकनीकी खराबी, इंजीनियरों ने संभाला मोर्चा
फ्लाइट में तकनीकी समस्या सामने आने के बाद एयर इंडिया एक्सप्रेस की इंजीनियरिंग टीम सक्रिय हुई। विमान की तकनीकी जांच शुरू की गई और जरूरी मरम्मत का काम किया गया। विमान की खामी दूर होने और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही उसे उड़ान की अनुमति दी जानी थी।
यात्रियों के लिए परेशानी सिर्फ इंतजार तक सीमित नहीं थी। लंबे समय तक उड़ान नहीं भरने के कारण कई यात्रियों को अपनी आगे की यात्रा और कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने की चिंता सताने लगी।

यात्रियों में नाराजगी, जानकारी को लेकर सवाल
लगातार बढ़ती देरी से यात्रियों में नाराजगी भी दिखाई दी। यात्रियों का कहना था कि तकनीकी खराबी जैसी स्थिति में एयरलाइन की ओर से उन्हें समय-समय पर स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी आगे की यात्रा की योजना बना सकें।
एयरपोर्ट पर आम यात्रियों के साथ वीआईपी यात्री भी उसी इंतजार में नजर आए। इससे साफ रहा कि विमान में तकनीकी दिक्कत आने के बाद इंतजार की कतार में किसी के पद या पहचान का असर नहीं चलता।

तीन घंटे का इंतजार, अब नजर उड़ान पर
फिलहाल यात्रियों की नजर विमान के दोबारा उड़ान भरने पर टिकी रही। तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत पूरी होने के बाद ही विमान को दिल्ली के लिए रवाना किया जाना था।
साफ बात यह है कि विमान की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता, लेकिन यात्रियों को घंटों इंतजार कराने के साथ-साथ उन्हें सही और समय पर जानकारी देना भी एयरलाइन की जिम्मेदारी है। तकनीकी खराबी कभी भी सामने आ सकती है, मगर ऐसी स्थिति में यात्री अंधेरे में न रहें—यही व्यवस्था की असली परीक्षा है।