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मंदसौर/चित्तौड़गढ़। मालवांचल मित्र आस्था जब अपने चरम पर होती है तो भेंट भी सामान्य नहीं रहती। कोई सोने का मुकुट चढ़ाता है, कोई चांदी का सिंहासन, तो कोई अपनी मनोकामना पूरी होने पर अनोखे उपहार अर्पित करता है। इसी कड़ी में श्री सांवलिया सेठ के दरबार में इस बार श्रद्धा का एक अलग ही नज़ारा देखने को मिला। बाबा को करीब 600 ग्राम चांदी से तैयार की गई एक आकर्षक बोलेरो कार भेंट की गई। बारीक कारीगरी से बनी यह चांदी की बोलेरो मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बन गई। जिसने भी इसे देखा, वह कुछ पल ठहरकर इसकी खूबसूरती और श्रद्धा के इस अनूठे स्वरूप को निहारता रहा। कहा जाता है कि सांवलिया सेठ के दरबार में भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भेंट अर्पित करते हैं। यहां नकद दान से लेकर सोना-चांदी, आभूषण और विभिन्न प्रकार की कीमती वस्तुएं चढ़ाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। अब इस सूची में चांदी की बोलेरो भी शामिल हो गई है।
दिलचस्प बात यह है कि आमतौर पर बोलेरो सड़क पर लोगों का ध्यान खींचती है, लेकिन यह बोलेरो मंदिर के दरबार में पहुंचकर श्रद्धालुओं की नजरों का केंद्र बन गई। फर्क सिर्फ इतना है कि यह सफर तय करने के लिए नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक बनकर आई है। हालांकि मंदिर प्रशासन की ओर से इस भेंट को लेकर कोई विशेष आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और श्रद्धालु इसे भक्ति की अनूठी मिसाल बता रहे हैं। सांवलिया सेठ के दरबार में चढ़ने वाली हर भेंट के पीछे किसी न किसी भक्त की आस्था जुड़ी होती है। 600 ग्राम चांदी की यह बोलेरो भी सिर्फ एक कलाकृति नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रतीक है, जो भक्तों को बार-बार बाबा के दरबार तक खींच लाता है। आखिर श्रद्धा की दुनिया में उपहार की कीमत नहीं, भावना का वजन सबसे बड़ा होता है।
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मंदसौर/चित्तौड़गढ़। मालवांचल मित्र
आस्था जब अपने चरम पर होती है तो भेंट भी सामान्य नहीं रहती। कोई सोने का मुकुट चढ़ाता है, कोई चांदी का सिंहासन, तो कोई अपनी मनोकामना पूरी होने पर अनोखे उपहार अर्पित करता है। इसी कड़ी में श्री सांवलिया सेठ के दरबार में इस बार श्रद्धा का एक अलग ही नज़ारा देखने को मिला।
बाबा को करीब 600 ग्राम चांदी से तैयार की गई एक आकर्षक बोलेरो कार भेंट की गई। बारीक कारीगरी से बनी यह चांदी की बोलेरो मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बन गई। जिसने भी इसे देखा, वह कुछ पल ठहरकर इसकी खूबसूरती और श्रद्धा के इस अनूठे स्वरूप को निहारता रहा।
कहा जाता है कि सांवलिया सेठ के दरबार में भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भेंट अर्पित करते हैं। यहां नकद दान से लेकर सोना-चांदी, आभूषण और विभिन्न प्रकार की कीमती वस्तुएं चढ़ाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। अब इस सूची में चांदी की बोलेरो भी शामिल हो गई है।

दिलचस्प बात यह है कि आमतौर पर बोलेरो सड़क पर लोगों का ध्यान खींचती है, लेकिन यह बोलेरो मंदिर के दरबार में पहुंचकर श्रद्धालुओं की नजरों का केंद्र बन गई। फर्क सिर्फ इतना है कि यह सफर तय करने के लिए नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक बनकर आई है।
हालांकि मंदिर प्रशासन की ओर से इस भेंट को लेकर कोई विशेष आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और श्रद्धालु इसे भक्ति की अनूठी मिसाल बता रहे हैं।
सांवलिया सेठ के दरबार में चढ़ने वाली हर भेंट के पीछे किसी न किसी भक्त की आस्था जुड़ी होती है। 600 ग्राम चांदी की यह बोलेरो भी सिर्फ एक कलाकृति नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रतीक है, जो भक्तों को बार-बार बाबा के दरबार तक खींच लाता है। आखिर श्रद्धा की दुनिया में उपहार की कीमत नहीं, भावना का वजन सबसे बड़ा होता है।