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भोपाल | मालवांचल मित्र मध्य प्रदेश की राजनीति में अब विकास, सड़क और निवेश के साथ आसमान की भी चर्चा होने लगी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश के दूसरे वीवीआईपी मेहमानों के सफर के लिए सरकार का नया विमान भोपाल पहुंच गया है। करीब 234 करोड़ रुपये की कीमत वाला बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 आधुनिक सुविधाओं से लैस ऐसा बिजनेस जेट है, जिसमें सफर के दौरान आराम और तकनीक का खास मेल देखने को मिलता है। कनाडा के टोरंटो से उड़ान भरकर बैंकॉक के रास्ते भोपाल पहुंचे इस विमान की रेंज करीब 6,300 किलोमीटर बताई गई है, जबकि इसकी अधिकतम रफ्तार लगभग 882 किलोमीटर प्रति घंटा है। यानी अब मुख्यमंत्री के हवाई सफर का इंतजाम पहले से ज्यादा आधुनिक होने जा रहा है। हालांकि, विमान भोपाल पहुंच गया है, लेकिन इसमें बैठकर पहली आधिकारिक उड़ान भरने के लिए अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ेगा। 2021 के हादसे के बाद किराये के विमानों पर निर्भर था प्रदेश इस नए विमान की कहानी सिर्फ चमक-दमक और महंगी सीटों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे प्रदेश की पुरानी हवाई व्यवस्था भी है। साल 2021 में ग्वालियर हवाई अड्डे पर राज्य सरकार का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसके बाद सरकार को वीवीआईपी यात्राओं के लिए चार्टर्ड विमान किराये पर लेने पड़े। ऐसी व्यवस्था में लगातार खर्च होता है और जरूरत के समय विमान की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अब सरकार ने अपना नया विमान खरीद लिया है। उम्मीद है कि इससे सरकारी यात्राओं के लिए एक स्थायी व्यवस्था तैयार होगी। हालांकि, 234 करोड़ रुपये की खरीद को कितना किफायती साबित किया जा सकेगा, इसका आकलन विमान की कीमत के साथ-साथ उसके रखरखाव, ईंधन, बीमा, चालक दल और सालाना परिचालन खर्च को देखकर ही किया जा सकेगा। क्योंकि विमान खरीदना एक बार का खर्च है, लेकिन उसे उड़ाए रखना हर साल का हिसाब है। आवाज से नियंत्रित होगा केबिन, सफर में मिलेगा खास आराम चैलेंजर 3500 की सबसे चर्चित खूबियों में इसका आधुनिक केबिन शामिल है। विमान में ऐसी तकनीक दी गई है, जिससे यात्री आवाज के जरिए केबिन की लाइटिंग और तापमान जैसी सुविधाओं को नियंत्रित कर सकते हैं। यानी सफर के दौरान रोशनी कम करनी हो या केबिन का माहौल अपनी पसंद के मुताबिक बनाना हो, तो हर बार बटन तलाशने की जरूरत नहीं। तकनीक के सहारे यह काम और आसान हो जाता है। विमान में खास तौर पर डिजाइन की गई आरामदायक सीटें भी हैं, जिन्हें लंबी यात्राओं में थकान कम करने के लिहाज से तैयार किया गया है। कंपनी की ओर से प्रचारित जीरो-ग्रैविटी सीटिंग तकनीक का उद्देश्य शरीर पर दबाव कम महसूस कराना और बैठने के आराम को बेहतर बनाना है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि यात्री वास्तव में गुरुत्वाकर्षण से मुक्त हो जाते हैं। नाम आधुनिक है, लेकिन विज्ञान अपने नियमों पर ही चलता है। 6,300 किलोमीटर की रेंज, 45 हजार फीट तक उड़ान इस विमान की तकनीकी क्षमता इसे सामान्य छोटी दूरी वाले विमानों से अलग बनाती है।
इतनी रेंज के कारण विमान देश के बड़े शहरों के बीच लंबी यात्राओं के लिए उपयोगी हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा की क्षमता भी इसकी खासियत है, लेकिन वास्तविक दूरी यात्रियों के वजन, मौसम, हवा की दिशा, ईंधन की जरूरत और अन्य परिचालन परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। इसलिए 6,300 किलोमीटर की रेंज को हर परिस्थिति में बिना रुके तय की जा सकने वाली निश्चित दूरी मानना सही नहीं होगा। गुजरात और महाराष्ट्र के विमानों से तुलना मध्य प्रदेश के नए विमान की तुलना दूसरे राज्यों के सरकारी विमानों से भी की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के पास बॉम्बार्डियर चैलेंजर 650 और महाराष्ट्र के सरकारी बेड़े में सेसना साइटेशन एक्सएलएस जैसे विमान रहे हैं। चैलेंजर 3500 नई पीढ़ी की तकनीक, केबिन सुविधाओं और आराम के मामले में एक आधुनिक बिजनेस जेट है। लेकिन किसी विमान को केवल कीमत या अधिकतम रफ्तार के आधार पर सबसे बेहतर घोषित करना उचित नहीं होगा। विमान की उपयोगिता, परिचालन खर्च, सुरक्षा व्यवस्था, उपलब्धता और सरकारी जरूरतों के हिसाब से भी तुलना जरूरी है। यानी तुलना में चमक-दमक के साथ हिसाब-किताब भी होना चाहिए। विदेशी पायलट संभालेंगे कमान, बीमा पर भी करोड़ों का खर्च रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार के दो पायलटों को विमान उड़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। शुरुआती एक वर्ष तक कनाडाई कंपनी की ओर से मुख्य पायलट उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी बताई गई है। इस दौरान प्रदेश के प्रशिक्षित पायलट उनके साथ काम करेंगे। विमान की कीमत को देखते हुए इसके बीमा की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में करीब 268 करोड़ रुपये के ऑल-रिस्क बीमा और लगभग दो करोड़ रुपये सालाना प्रीमियम का उल्लेख किया गया है। इन आंकड़ों की अंतिम पुष्टि सरकारी दस्तावेजों से की जानी चाहिए। इतने महंगे विमान के मामले में सुरक्षा और बीमा पर खर्च कोई छोटी बात नहीं है। आखिर आसमान में उड़ान जितनी ऊंची होगी, जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होगी। भोपाल पहुंचा विमान, लेकिन पहली उड़ान में अभी वक्त विमान के भोपाल पहुंचने के बाद भी उसका नियमित सरकारी इस्तेमाल तुरंत शुरू नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, तकनीकी और कानूनी औपचारिकताएं पूरी होना बाकी हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की जांच और जरूरी मंजूरियों के बाद ही विमान को आधिकारिक उड़ानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। इन प्रक्रियाओं में कई सप्ताह लग सकते हैं। लिहाजा फिलहाल विमान का भोपाल पहुंचना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन इसे नियमित सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है। शाही सफर के साथ जनता के सवाल भी जरूरी मध्य प्रदेश को आधुनिक सरकारी विमान मिलना वीवीआईपी यात्राओं की व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम हो सकता है। इससे मुख्यमंत्री की आधिकारिक यात्राओं में सुविधा और समय प्रबंधन को मदद मिलने की उम्मीद है। लेकिन लोकतंत्र में सरकारी खर्च का हिसाब भी उतना ही जरूरी है जितना विमान की रफ्तार का आंकड़ा। 234 करोड़ रुपये की खरीद के साथ जनता यह जानना चाहेगी कि पुराने किराये के विमानों की तुलना में कितनी बचत होगी, सालाना परिचालन खर्च कितना रहेगा और इस निवेश का वास्तविक लाभ क्या होगा। विमान की रफ्तार 882 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है, लेकिन सरकारी खर्च की जवाबदेही भी उतनी ही तेजी से जनता तक पहुंचनी चाहिए। आखिर सरकारी विमान आसमान में उड़ता है, मगर उसका बिल अंततः जनता के पैसे से ही चुकाया जाता है। नोट: यह समाचार उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। विमान की लागत, तकनीकी आंकड़ों, बीमा और परिचालन संबंधी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि के बाद ही उन्हें अंतिम सरकारी आंकड़ा माना जाना चाहिए। |
भोपाल | मालवांचल मित्र
मध्य प्रदेश की राजनीति में अब विकास, सड़क और निवेश के साथ आसमान की भी चर्चा होने लगी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश के दूसरे वीवीआईपी मेहमानों के सफर के लिए सरकार का नया विमान भोपाल पहुंच गया है। करीब 234 करोड़ रुपये की कीमत वाला बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 आधुनिक सुविधाओं से लैस ऐसा बिजनेस जेट है, जिसमें सफर के दौरान आराम और तकनीक का खास मेल देखने को मिलता है।
कनाडा के टोरंटो से उड़ान भरकर बैंकॉक के रास्ते भोपाल पहुंचे इस विमान की रेंज करीब 6,300 किलोमीटर बताई गई है, जबकि इसकी अधिकतम रफ्तार लगभग 882 किलोमीटर प्रति घंटा है। यानी अब मुख्यमंत्री के हवाई सफर का इंतजाम पहले से ज्यादा आधुनिक होने जा रहा है। हालांकि, विमान भोपाल पहुंच गया है, लेकिन इसमें बैठकर पहली आधिकारिक उड़ान भरने के लिए अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ेगा।
2021 के हादसे के बाद किराये के विमानों पर निर्भर था प्रदेश
इस नए विमान की कहानी सिर्फ चमक-दमक और महंगी सीटों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे प्रदेश की पुरानी हवाई व्यवस्था भी है।
साल 2021 में ग्वालियर हवाई अड्डे पर राज्य सरकार का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसके बाद सरकार को वीवीआईपी यात्राओं के लिए चार्टर्ड विमान किराये पर लेने पड़े। ऐसी व्यवस्था में लगातार खर्च होता है और जरूरत के समय विमान की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अब सरकार ने अपना नया विमान खरीद लिया है। उम्मीद है कि इससे सरकारी यात्राओं के लिए एक स्थायी व्यवस्था तैयार होगी। हालांकि, 234 करोड़ रुपये की खरीद को कितना किफायती साबित किया जा सकेगा, इसका आकलन विमान की कीमत के साथ-साथ उसके रखरखाव, ईंधन, बीमा, चालक दल और सालाना परिचालन खर्च को देखकर ही किया जा सकेगा।
क्योंकि विमान खरीदना एक बार का खर्च है, लेकिन उसे उड़ाए रखना हर साल का हिसाब है।
आवाज से नियंत्रित होगा केबिन, सफर में मिलेगा खास आराम
चैलेंजर 3500 की सबसे चर्चित खूबियों में इसका आधुनिक केबिन शामिल है। विमान में ऐसी तकनीक दी गई है, जिससे यात्री आवाज के जरिए केबिन की लाइटिंग और तापमान जैसी सुविधाओं को नियंत्रित कर सकते हैं।
यानी सफर के दौरान रोशनी कम करनी हो या केबिन का माहौल अपनी पसंद के मुताबिक बनाना हो, तो हर बार बटन तलाशने की जरूरत नहीं। तकनीक के सहारे यह काम और आसान हो जाता है।
विमान में खास तौर पर डिजाइन की गई आरामदायक सीटें भी हैं, जिन्हें लंबी यात्राओं में थकान कम करने के लिहाज से तैयार किया गया है। कंपनी की ओर से प्रचारित जीरो-ग्रैविटी सीटिंग तकनीक का उद्देश्य शरीर पर दबाव कम महसूस कराना और बैठने के आराम को बेहतर बनाना है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि यात्री वास्तव में गुरुत्वाकर्षण से मुक्त हो जाते हैं। नाम आधुनिक है, लेकिन विज्ञान अपने नियमों पर ही चलता है।
6,300 किलोमीटर की रेंज, 45 हजार फीट तक उड़ान
इस विमान की तकनीकी क्षमता इसे सामान्य छोटी दूरी वाले विमानों से अलग बनाती है।
कीमत: करीब 234 करोड़ रुपये
अधिकतम रफ्तार: लगभग 882 किलोमीटर प्रति घंटा
बताई गई उड़ान रेंज: करीब 6,300 किलोमीटर
अधिकतम ऊंचाई: लगभग 45,000 फीट
प्रमुख उपयोग: मुख्यमंत्री और अन्य वीवीआईपी की आधिकारिक यात्राएं
इतनी रेंज के कारण विमान देश के बड़े शहरों के बीच लंबी यात्राओं के लिए उपयोगी हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा की क्षमता भी इसकी खासियत है, लेकिन वास्तविक दूरी यात्रियों के वजन, मौसम, हवा की दिशा, ईंधन की जरूरत और अन्य परिचालन परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
इसलिए 6,300 किलोमीटर की रेंज को हर परिस्थिति में बिना रुके तय की जा सकने वाली निश्चित दूरी मानना सही नहीं होगा।
गुजरात और महाराष्ट्र के विमानों से तुलना
मध्य प्रदेश के नए विमान की तुलना दूसरे राज्यों के सरकारी विमानों से भी की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के पास बॉम्बार्डियर चैलेंजर 650 और महाराष्ट्र के सरकारी बेड़े में सेसना साइटेशन एक्सएलएस जैसे विमान रहे हैं।
चैलेंजर 3500 नई पीढ़ी की तकनीक, केबिन सुविधाओं और आराम के मामले में एक आधुनिक बिजनेस जेट है। लेकिन किसी विमान को केवल कीमत या अधिकतम रफ्तार के आधार पर सबसे बेहतर घोषित करना उचित नहीं होगा। विमान की उपयोगिता, परिचालन खर्च, सुरक्षा व्यवस्था, उपलब्धता और सरकारी जरूरतों के हिसाब से भी तुलना जरूरी है।
यानी तुलना में चमक-दमक के साथ हिसाब-किताब भी होना चाहिए।
विदेशी पायलट संभालेंगे कमान, बीमा पर भी करोड़ों का खर्च
रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार के दो पायलटों को विमान उड़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। शुरुआती एक वर्ष तक कनाडाई कंपनी की ओर से मुख्य पायलट उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी बताई गई है। इस दौरान प्रदेश के प्रशिक्षित पायलट उनके साथ काम करेंगे।
विमान की कीमत को देखते हुए इसके बीमा की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में करीब 268 करोड़ रुपये के ऑल-रिस्क बीमा और लगभग दो करोड़ रुपये सालाना प्रीमियम का उल्लेख किया गया है। इन आंकड़ों की अंतिम पुष्टि सरकारी दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
इतने महंगे विमान के मामले में सुरक्षा और बीमा पर खर्च कोई छोटी बात नहीं है। आखिर आसमान में उड़ान जितनी ऊंची होगी, जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होगी।
भोपाल पहुंचा विमान, लेकिन पहली उड़ान में अभी वक्त
विमान के भोपाल पहुंचने के बाद भी उसका नियमित सरकारी इस्तेमाल तुरंत शुरू नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, तकनीकी और कानूनी औपचारिकताएं पूरी होना बाकी हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की जांच और जरूरी मंजूरियों के बाद ही विमान को आधिकारिक उड़ानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इन प्रक्रियाओं में कई सप्ताह लग सकते हैं। लिहाजा फिलहाल विमान का भोपाल पहुंचना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन इसे नियमित सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है।
शाही सफर के साथ जनता के सवाल भी जरूरी
मध्य प्रदेश को आधुनिक सरकारी विमान मिलना वीवीआईपी यात्राओं की व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम हो सकता है। इससे मुख्यमंत्री की आधिकारिक यात्राओं में सुविधा और समय प्रबंधन को मदद मिलने की उम्मीद है।
लेकिन लोकतंत्र में सरकारी खर्च का हिसाब भी उतना ही जरूरी है जितना विमान की रफ्तार का आंकड़ा। 234 करोड़ रुपये की खरीद के साथ जनता यह जानना चाहेगी कि पुराने किराये के विमानों की तुलना में कितनी बचत होगी, सालाना परिचालन खर्च कितना रहेगा और इस निवेश का वास्तविक लाभ क्या होगा।
विमान की रफ्तार 882 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है, लेकिन सरकारी खर्च की जवाबदेही भी उतनी ही तेजी से जनता तक पहुंचनी चाहिए। आखिर सरकारी विमान आसमान में उड़ता है, मगर उसका बिल अंततः जनता के पैसे से ही चुकाया जाता है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। विमान की लागत, तकनीकी आंकड़ों, बीमा और परिचालन संबंधी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि के बाद ही उन्हें अंतिम सरकारी आंकड़ा माना जाना चाहिए।