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मालवांचल मित्र, नीमच: मध्य प्रदेश एवं मालवा की सीमा पर स्थित नीमच साहित्य, संस्कृति एवं सेवा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। इसी क्रम में शहर में प्रबुद्ध जनों के विचार-विमर्श हेतु प्रज्ञा प्रवाह का अध्ययन केंद्र प्रारंभ किया जाएगा। यह जानकारी प्रज्ञा प्रवाह मालवा प्रांत के संयोजक डॉ. डी.डी. बेदिया ने अन्नपूर्णा सेवा न्यास कार्यालय में आयोजित प्रबुद्ध नागरिकों की बैठक को संबोधित करते हुए दी। डॉ. बेदिया ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह सनातन संस्कृति, स्वबोध एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित विषयों पर विचार-विमर्श का मंच है। इसके माध्यम से प्रबुद्धजन भारतीय संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा कर निष्कर्षों को जनसाधारण तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रज्ञा प्रवाह मालवा प्रांत की महिला इकाई की प्रमुख डॉ. समीक्षा नायक ने बताया कि संगठन के चार प्रमुख आयाम—युवा, महिला, शोध प्रकल्प एवं प्रचार प्रकल्प हैं। इन सभी का समन्वय अध्ययन केंद्र के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अध्ययन केंद्र की नियमित साप्ताहिक बैठकें आयोजित होंगी, जिनमें राष्ट्रीय संस्कृति एवं समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श होगा। इन बैठकों से प्राप्त सार्थक निष्कर्ष समाज के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। वरिष्ठ नागरिक पारसमल पटवा ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार सनातन संस्कृति है तथा सनातन का आधार हिंदुत्व है। इसलिए राष्ट्र और उसकी संस्कृति को सुदृढ़ बनाने के लिए हिंदुत्व पर गहन अध्ययन एवं चिंतन आवश्यक है।
साहित्य परिषद के संयोजक ओमप्रकाश चौधरी ने सुझाव देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी का पाठक मंच विचार-विमर्श का एक प्रभावी केंद्र रहा है। वर्तमान में उसके कार्यों को पुनः सुचारू रूप से संचालित करने का प्रयास किया जाना चाहिए, जिससे प्रज्ञा प्रवाह के विमर्श को भी गति मिल सके। अन्नपूर्णा सेवा न्यास के राकेश ‘पप्पू’ जैन ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह के माध्यम से राष्ट्रीय विचारों के प्रचार-प्रसार द्वारा संस्कृति संरक्षण एवं संस्कार निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकेगा। अजय भटनागर ने भी अध्ययन केंद्र की स्थापना पर शुभकामनाएं व्यक्त कीं। पर्यावरण संकल्प के जगदीश शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रज्ञा प्रवाह की संभावित भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि कुटुंब प्रबोधन के नरेश सोनी ने आदर्श परिवार की संकल्पना को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक में अंबिका प्रसाद सोनी, जोशी, डॉ. सुरेंद्र शक्तावत तथा डॉ. विवेक नागर ने विभिन्न प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कीं, जिनका समाधान डॉ. बेदिया एवं डॉ. समीक्षा नायक ने किया। अध्ययन केंद्र के गठन को लेकर आयोजित इस बैठक में सेवानिवृत्त प्राचार्य अमृतलाल चौहान, दिनेश कुमार शर्मा, राजमल व्यास, अजय जिंदल, दीपा राठौर, ज्योति सोनी सहित अनेक गणमान्य एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 27 जून को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती के अवसर पर उनके साहित्य पर विशेष विचार-विमर्श आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन प्रज्ञा प्रवाह के विभाग सहसंयोजक प्रवीण अरोन्देकर ने किया। |
मालवांचल मित्र, नीमच: मध्य प्रदेश एवं मालवा की सीमा पर स्थित नीमच साहित्य, संस्कृति एवं सेवा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। इसी क्रम में शहर में प्रबुद्ध जनों के विचार-विमर्श हेतु प्रज्ञा प्रवाह का अध्ययन केंद्र प्रारंभ किया जाएगा। यह जानकारी प्रज्ञा प्रवाह मालवा प्रांत के संयोजक डॉ. डी.डी. बेदिया ने अन्नपूर्णा सेवा न्यास कार्यालय में आयोजित प्रबुद्ध नागरिकों की बैठक को संबोधित करते हुए दी।
डॉ. बेदिया ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह सनातन संस्कृति, स्वबोध एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित विषयों पर विचार-विमर्श का मंच है। इसके माध्यम से प्रबुद्धजन भारतीय संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा कर निष्कर्षों को जनसाधारण तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रज्ञा प्रवाह मालवा प्रांत की महिला इकाई की प्रमुख डॉ. समीक्षा नायक ने बताया कि संगठन के चार प्रमुख आयाम—युवा, महिला, शोध प्रकल्प एवं प्रचार प्रकल्प हैं। इन सभी का समन्वय अध्ययन केंद्र के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अध्ययन केंद्र की नियमित साप्ताहिक बैठकें आयोजित होंगी, जिनमें राष्ट्रीय संस्कृति एवं समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श होगा। इन बैठकों से प्राप्त सार्थक निष्कर्ष समाज के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
वरिष्ठ नागरिक पारसमल पटवा ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार सनातन संस्कृति है तथा सनातन का आधार हिंदुत्व है। इसलिए राष्ट्र और उसकी संस्कृति को सुदृढ़ बनाने के लिए हिंदुत्व पर गहन अध्ययन एवं चिंतन आवश्यक है।

साहित्य परिषद के संयोजक ओमप्रकाश चौधरी ने सुझाव देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी का पाठक मंच विचार-विमर्श का एक प्रभावी केंद्र रहा है। वर्तमान में उसके कार्यों को पुनः सुचारू रूप से संचालित करने का प्रयास किया जाना चाहिए, जिससे प्रज्ञा प्रवाह के विमर्श को भी गति मिल सके।
अन्नपूर्णा सेवा न्यास के राकेश ‘पप्पू’ जैन ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह के माध्यम से राष्ट्रीय विचारों के प्रचार-प्रसार द्वारा संस्कृति संरक्षण एवं संस्कार निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकेगा। अजय भटनागर ने भी अध्ययन केंद्र की स्थापना पर शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
पर्यावरण संकल्प के जगदीश शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रज्ञा प्रवाह की संभावित भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि कुटुंब प्रबोधन के नरेश सोनी ने आदर्श परिवार की संकल्पना को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।

बैठक में अंबिका प्रसाद सोनी, जोशी, डॉ. सुरेंद्र शक्तावत तथा डॉ. विवेक नागर ने विभिन्न प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कीं, जिनका समाधान डॉ. बेदिया एवं डॉ. समीक्षा नायक ने किया।
अध्ययन केंद्र के गठन को लेकर आयोजित इस बैठक में सेवानिवृत्त प्राचार्य अमृतलाल चौहान, दिनेश कुमार शर्मा, राजमल व्यास, अजय जिंदल, दीपा राठौर, ज्योति सोनी सहित अनेक गणमान्य एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 27 जून को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती के अवसर पर उनके साहित्य पर विशेष विचार-विमर्श आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन प्रज्ञा प्रवाह के विभाग सहसंयोजक प्रवीण अरोन्देकर ने किया।