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मालवांचल मित्र, रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के बड़ावदा स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा में करोड़ों नहीं, बल्कि लाखों रुपये के चर्चित गबन मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। विशेष न्यायालय ने बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक नेविल कावराना को लगभग 44.46 लाख रुपये के गबन का दोषी मानते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। फैसले के बाद दोषी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
वर्षों तक चली जांच के बाद आया फैसला मामले की शुरुआत तब हुई जब बैंक की शाखा में नए प्रबंधक ने कार्यभार संभालने के बाद खातों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की। जांच के दौरान कई लेनदेन संदिग्ध पाए गए, जिसके बाद मामले की शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) से की गई। विस्तृत जांच के बाद अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया और लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया। पद का दुरुपयोग कर राशि का कथित गबन अभियोजन पक्ष के अनुसार, वर्ष 2012 से 2014 के बीच तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक की राशि का कथित रूप से अनियमित तरीके से हस्तांतरण कराया। जांच में सामने आया कि धनराशि विभिन्न खातों के माध्यम से स्वयं, अपने परिजनों तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के खातों में पहुंचाई गई। आरोप यह भी था कि कुछ ग्राहकों के खातों से उनकी जानकारी या अनुमति के बिना राशि निकाली गई और बैंकिंग प्रक्रियाओं में हेरफेर कर लेनदेन को छिपाने का प्रयास किया गया।
अन्य आरोपियों को मिली राहत इस मामले में कुल नौ लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था। सुनवाई के दौरान दो आरोपियों का निधन हो गया, जबकि शेष अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। मुख्य आरोपी के विरुद्ध उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने दोष सिद्ध माना। अदालत का फैसला विशेष न्यायालय ने दोषी पूर्व शाखा प्रबंधक को विभिन्न धाराओं के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास तथा नियमानुसार अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत के आदेश के बाद दोषी को जेल भेज दिया गया। न्यायालय ने माना कि बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में जवाबदेही तय करना आवश्यक है। बैंकिंग व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संदेश यह फैसला सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मामलों में समयबद्ध जांच और न्यायिक कार्रवाई से बैंकिंग प्रणाली में ग्राहकों का विश्वास मजबूत होता है तथा वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में सहायता मिलती है. |
मालवांचल मित्र, रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के बड़ावदा स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा में करोड़ों नहीं, बल्कि लाखों रुपये के चर्चित गबन मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। विशेष न्यायालय ने बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक नेविल कावराना को लगभग 44.46 लाख रुपये के गबन का दोषी मानते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। फैसले के बाद दोषी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

वर्षों तक चली जांच के बाद आया फैसला
मामले की शुरुआत तब हुई जब बैंक की शाखा में नए प्रबंधक ने कार्यभार संभालने के बाद खातों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की। जांच के दौरान कई लेनदेन संदिग्ध पाए गए, जिसके बाद मामले की शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) से की गई। विस्तृत जांच के बाद अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया और लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया।
पद का दुरुपयोग कर राशि का कथित गबन
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वर्ष 2012 से 2014 के बीच तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक की राशि का कथित रूप से अनियमित तरीके से हस्तांतरण कराया। जांच में सामने आया कि धनराशि विभिन्न खातों के माध्यम से स्वयं, अपने परिजनों तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के खातों में पहुंचाई गई। आरोप यह भी था कि कुछ ग्राहकों के खातों से उनकी जानकारी या अनुमति के बिना राशि निकाली गई और बैंकिंग प्रक्रियाओं में हेरफेर कर लेनदेन को छिपाने का प्रयास किया गया।

अन्य आरोपियों को मिली राहत
इस मामले में कुल नौ लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था। सुनवाई के दौरान दो आरोपियों का निधन हो गया, जबकि शेष अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। मुख्य आरोपी के विरुद्ध उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने दोष सिद्ध माना।
अदालत का फैसला
विशेष न्यायालय ने दोषी पूर्व शाखा प्रबंधक को विभिन्न धाराओं के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास तथा नियमानुसार अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत के आदेश के बाद दोषी को जेल भेज दिया गया। न्यायालय ने माना कि बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
बैंकिंग व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संदेश
यह फैसला सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मामलों में समयबद्ध जांच और न्यायिक कार्रवाई से बैंकिंग प्रणाली में ग्राहकों का विश्वास मजबूत होता है तथा वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में सहायता मिलती है.